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बच्चो को पढ़ने व संस्कार के लिये समाज सेवको के प्रोत्साहन की जरूरत

फरीदाबाद
ब्यूरो रिपोर्ट

खुशियों के खजाने की संस्थापक श्रीमती उमा गर्ग व उनके साथ श्रीमती कमलेश गोयल,दर्शन गर्ग , सरोज गोयल ऐसी बस्ती में गई जहां रास्ते भी इतने दुर्लभ थे जहां पहुंचना भी बड़ा मुश्किल था,पढ़ाने के लिए तो सोचना ही असंभव था। लेकिन जो टीचर उन बच्चों को पढ़ा रही है उनके लिए हम सब बहुत बहुत शुक्रगुजार हैं कि उन छोटे छोटे बच्चों का भविष्य बनाने में जुटी है जिनके खुद के भी बच्चे इतने छोटे हैं। वह बच्चों के लिए अथक प्रयास कर रहे हैं। उन बच्चों से वहां हमने बहुत सी बातें की, बच्चों ने हमें कुछ गिनतियां कविताएं एबीसीडी इत्यादि सुनाई। हमने  बच्चों से ताड़ासन ,खुलकर हंसी कराई। सभी बच्चे बड़े खुश हुए। वहां हमने उन बच्चों के लिए उनके सिलेबस की जितनी किताबें थी उनके लिए योगदान किया। अभी भी उन बच्चों के लिए यूनिफॉर्म की जरूरत है। अभी हमारा प्रयास चल रहा है हम उनकी पूरी तरह से मदद कर सकें। यह स्कूल ऊंचा गांव बल्लभगढ़ मैं है। स्कूल में लगभग 37 बच्चे हैं जिनकी उम्र 3-6 साल तक की हैं।सभी काम वालियों के बच्चे वहां पर पढ़ते हैं जो अपने बच्चों को पढ़ाने में असमर्थ हैं। श्रीमती उषा जी व श्रीमती पूर्णिमा जी वहां पढ़ा रही हैं बल्कि वह अपने घर पर भी ट्यूशन करके उस पैसे को भी उन छोटे बच्चों की सेवा में लगा रहे हैं । उन टीचर व बच्चों से मिलकर हमारे अंदर एक अलग ही जागरूकता आई अगर हम सब भारतवासी इसी तरह के अनपढ़ बच्चों के लिए पढ़ाई पर जोर दें समय निकाल कर उन को पढ़ाने के लिए व उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए मन के भाव बनाकर रखें तो शायद हमारा भारतवर्ष का एक-एक बच्चा पढ़ा लिखा होगा
रिपोर्ट:एम पी सिंह (ब्यूरो चीफ)

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