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अगर बेरोजगारी खत्म करना चाहती हैं सरकार यो खारिज करे राजनीतिकों को दिए गए सरकारी जमीन के पट्टे


अगर देश से वास्तव में सरकार बेरोजगारी को ईमानदारी से खत्म करना चाहती है तो उसको सभी  जनपद स्तरों पर कारखाने और लघु उद्योगों को लगाना होगा,परन्तु समस्या है कारखाने लगाने के लिए जमीन कहा से आएगी,तो मेरा अपना मानना है, कि प्रत्येक जनपद में जितनी भी जमीन स्थानीय राजनीतिको को पट्टे पर सरकार द्वारा दी गई है उसके पट्टे तत्काल प्रभाव से खारिज कर दिए जाएं,और उस भूमि पर सरकार कोई भी कारखाने,व लघु उद्योग लगाकर मात्र उन्ही जनपदों के पात्र नोजवानों को नोकरियां दे,इससे होगा ये कि एक तरफ स्थानीय जनपद स्तर पर नोजवानों को नौकरियां मिल जाएगी,और उनको दूसरी जगहों पर जाकर नोकरी के लिए भटकना नही पड़ेगा।अब प्रश्न ये उठता है, कि बिल्ली के गले मे घण्टी कौन बांधे? क्योंकि राजनीति में चोर चोर मौसेरे भाई होते हैं और जो राजनीतिक व्यक्ति गद्दी पर विराजमान है बो अपने दूसरे भाई का बुरा क्यों चाहने लगा,उत्तर प्रदेश में शायद ही कोई नेता बचा हो जिसके पास तमाम जायदाद होने के बावजूद भी सरकारी पट्टे की जमीन न हो।ऐसी स्थिति में देश को बेरोजगारी से मुक्त करना सभी पार्टियों का चुनावी मुद्दा तो हो सकता है, पर ईमानदारी से बेरोजगारी खत्म करना उनकी ज़हनियत (सोचका)हिस्सा नही है,अगर केंद्र की सरकार कानून बनाकर तीन तलाक खत्म कराने की हिम्मत रखती है, तो उसको चाहिए,कि वह समस्त प्रदेश सरकारों को आदेशित करे कि आप सभी उन राजनीतिको के सरकारी ज़मीनों के पट्टे खारिज कराकर,उनपर सरकारी सरकारी फैक्ट्रियां लगावाने का काम करें,तो उससे सभी बेरोजगारों को नौकरियां मिल जाएगी,और देश से बेरोजगारी प्रायः समाप्त हो सकती है।इसके लिए सरकारों को प्रभावी कदम उठाने पड़ेगे।
विचार :- देवेंद्र शर्मा देवू वरिष्ठ पत्रकार

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