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एटा: 'चमन' को अपने ही चुभोते रहे 'शूल'

जब तरेरी आंखें, तो लगे खटकने

ढाई माह के कार्यकाल में जनता पर छोड़ी अमिट छाप

एटा: एक समय ऐसा था, जब थाना परिसर में 'बाहरियों' की 'पैंठ' लगती थी। अफसरों तक शिकायत पहुंची, तो थाना को 'चमन' से 'गुलजार' किया। आंखें तरेरी, तो 'बाहरियों' की 'पैंठ' खत्म हो गई। फरियादी सीधे फरियाद सुनाने लगे और उनकी समस्या का समाधान होने लगा। बस यही 'राह' कुछ 'बाहरियों' व 'अपनों' को खटकने लगी और उन्होंने 'चमन' की 'राह' में 'शूल' बिछाना शुरू कर दिया। यही 'शूल' कभी परस्पर सहयोग न करने या सूचना लीक करने के रूप में 'चमन' को पूरे ढाई माह चुभते रहे।
     दरसअल, जैथरा थानाप्रभारी चमन गोस्वामी का मात्र ढाई माह के समयांतराल में ही जिले के दूसरे थाना में स्थानांतरण कर दिया गया। हालांकि स्थानांतरण एक विभागीय प्रक्रिया है,परन्तु जैसी चर्चा है उससे आमजन स्तब्ध है। थानाप्रभारी के स्थानांतरण की चर्चा उस रोज से ही शुरू हो गई थी, जिस रोज से उन्होंने थाने में लगने वाली 'बाहरियों' की 'पैंठ' को खत्म कर दिया था। समय बदस्तूर चलता रहा और कुछ 'अपनों' व 'बाहरियों' का गठजोड़ अंदर ही अंदर परवान चढ़ता गया। थानाप्रभारी चमन गोस्वामी ने शासन की मंशा के अनुकूल न सिर्फ फरियादियों का दुखड़ा स्वयं  सुनना शुरू किया, बल्कि प्रत्येक प्रार्थना पत्र की जांच को स्वयं मौके पर पहुंचने लगे। 'पहले पानी, फिर सुनाएं परेशानी' की रीति को कायम रखा। फरियादी की फरियाद पर सीधे थानाप्रभारी द्वारा सुनवाई करना एवं प्रत्येक प्रार्थनापत्र को संबंधित रजिस्टर पर अंकित करना जैसे और भी कई नियम कुछ 'अपनों' को खटकने लगे। जिससे परस्पर सहयोग की भावना खत्म सी होने लगी। अपराधियों को गिरफ्त में लेने से पूर्व ही सूचनाएं लीक होने लगी, जिससे गुडवर्क पर ब्रेक सा लग गया। हालांकि 'अपने' उन्हें पग-पग 'शूल' चुभोते रहे, परन्तु वह क्षेत्र में दौड़ते रहे। तीन रोज पूर्व थानाप्रभारी के स्थानांतरण की चर्चा फिर तेज हुई और अंततः चर्चा यकीन में बदल गई। हालांकि लगभग ढाई माह के कार्यकाल में थानाप्रभारी चमन गोस्वामी ने अपनी कार्यप्रणाली की जनता पर जो अमिट छाप छोड़ी है,उसे जनता नहीं भूल पा रही है।
रिपोर्ट- सुनील कुमार

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