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एटा: दरवाजा खोलो, नए साल पर पुलिस आई है!




जैथरा थाना के आरक्षियों ने गरीब हसीन का बांटा दुःख

एटा। दरवाजा खोलो, पुलिस आई है! यह आवाज सुन गम के बोझ तले दबे हसीन अपने कमरे केे अंदर सहम से गए, पर दरवाजा खोला तो पाया कि, जैथरा पुलिस के दो आरक्षी गर्म कपड़े व मिठाई लिए खड़े हैं।
      यह देख हसीन को अपनी आंखों पर यकीन नहीं हो रहा था। उसकी आंखें भर आई और दरवाजे पर खड़े जैथरा पुलिस के आरक्षियों ने उन्हें गले से लगा लिया।
    वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक आशीष तिवारी के निर्देशन में जनपदीय पुलिस का हर रोज मानवीय रूप देखने को मिल रहा है। स्वयं एसएसपी भी पुलिस और पब्लिक के बीच की दूरी खत्म करने को नित नए कार्यक्रम भी आयोजित करा रहे हैं, जिससे आम आदमी पुलिस को अपना दोस्त समझ सके और वह बिना किसी डर के अपनी परेशानी बयां कर सके। एसएसपी के इसी सपने को जैथरा पुलिस के दो आरक्षियों ने साकार करने का प्रयास किया है। दोनों आरक्षियों ने न सिर्फ गरीब का दुःख बांटने का प्रयास किया, बल्कि उनके साथ नववर्ष की खुशियां भी साझा कीं।
     दरअसल, ऐसा होता है कि यदि किसी के दरवाजे पर पुलिस के जवान खड़े हो जाएं, तो उसके दिमाग में एक ही बात सामने आती है कही पुलिस उसे गिरफ्तार करने या अन्य कारणों से तो नहीं आई है, लेकिन इस नववर्ष पर जैथरा पुलिस ने मानवीय चेहरा पेश किया। आरक्षी दिव्य बालियान व दीपक त्रिवेदी ने हसीन की पुत्रियों को गर्म वस्त्र,कम्बल, मिठाई  आर्थिक मदद प्रदान की।
     बताते चलें कि विगत 23 दिसंबर की रात में जैथरा की कांशीराम आवासीय कालोनी निवासी हसीन के कमरे में शार्ट सर्किट से आग लग गई थी, जिसमें उसके पुत्र सुभान की मौत हो गई थी। जबकि चार पुत्रियां अलीसा, मारा, सिमरिया व जोया घायल हो गईं थीं।
रिपोर्ट- सुनील कुमार

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