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टीबी रोग की जानकारी को निक्षय पोर्टल नये अवतार मे

निक्षय पोर्टल अब नए अवतार में-----
24 सितम्बर को पूरे देश में लांच होगा निक्षय पोर्टल-2
इलाज के साथ ही मिलने लगेगी पौष्टिक आहार राशि
मोबाइल, टैबलेट पर भी आसानी से कर सकेंगे ऑपरेट
टीबी मरीजों को 6 से 7 अंकों की जारी होगी आईडी।
एचआईवी का 99 डाट्स भी जुड़ जाएगा निक्षय-2 से 
 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वर्ष 2025 तक देश से क्षय रोग (टीबी) को पूरी तरह से ख़त्म करने के संकल्प को साकार करने को लेकर निक्षय पोर्टल में खास बदलाव किया गया गया है।24 सितम्बर को सुबह छह बजे से निक्षय पोर्टल-2 पूरे देश में लांच हो जाएगा। यह पूरी तरह से ऑटोमेटेड होगा। सिबिनाट मशीन की जाँच रिपोर्ट सीधे पोर्टल पर पहुँच जाएगी। इसबीच निक्षय पोर्टल-1 को 19 सितम्बर दोपहर दो बजे से बंद कर दिया गया है। नए वर्जन में टीबी मरीजों को पोर्टल पर नोटिफाई करते ही उनका बैंक डिटेल भी अपडेट हो जाएगा और इलाज शुरू होने के साथ ही उन्हें पांच सौ रूपये मासिक की पौष्टिक आहार राशि भी मिलने लगेगी। इलाज के दौरान मरीज को पौष्टिक आहार राशि न मिलने की शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए यह आमूलचूल परिवर्तन किया गया है। इसके अलावा भी कई अन्य परिवर्तन किये गए हैं ताकि समय से इलाज मुहैया कराकर इस बीमारी को जड़ से ख़त्म किया जा सके।

सरकारी व प्राइवेट डॉक्टर अब एक ही जगह कर सकेंगे नोटिफाई :------
निक्षय पोर्टल-2 में ऐसी व्यवस्था की गयी है की अब सरकारी और प्राइवेट डॉक्टर के अलावा लैब व केमिस्ट भी एक ही जगह टीबी मरीज को नोटिफाई कर सकेंगे।अस्पतालों को भी मरीजों की फीडिंग की सुविधा मिल जाएगी। इसके अलावा एचआईवी मरीजों के विवरण सम्बन्धी पोर्टल 99 डाट्स को भी इससे जोड़ा जा रहा है, ताकि टीबी और एचआईवी मरीजों की जानकारी एक ही जगह मिल सके।इससे यह आसानी होगी की मरीजों की सही-सही संख्या के साथ ही उनके चल रहे इलाज की जानकारी भी आसानी से मिल जाएगी। पोर्टल पर मरीज के नोटिफाई होने और बैंक डिटेल डालने के साथ ही इसकी जानकारी पब्लिक फाइनेंस मैनेजमेंट सिस्टम (पीएफएमएस) तक पहुँच जाएगी और मरीज के आधार से लिंक बैंक खाते में पौष्टिक आहार राशि पहुँचने लगेगी। पहले नोटिफिकेशन के बाद यह ब्लॉक को भेजा जाता था, जिससे विलम्ब होता था।यदि किसी मरीज का भुगतान पेंडिंग होगा तो वह भी बोर्ड पर प्रदर्शित करेगा। इसके अलावा अब औषधि प्रतिरोधी और औषधि संवेदनशील मरीजों की अलग से फाइल नहीं बनेगी, उनका विवरण भी पोर्टल पर एक ही जगह होगा।

टोल फ्री नंबर से पता चलेगा की दवा ली या नहीं :-----
अब यह व्यवस्था भी होने जा रही है कि दवा के पैकेट के साथ एक टोल फ्री नंबर होगा, जिस पर फोन करके बताना होगा कि मरीज ने दवा ले ली है। एचआईवी के मामले में यह व्यवस्था पहले से थी। आने वाले समय में पैकेट पर चिप की सुविधा भी कर दी जाएगी, जिससे पैकेट खोलते ही पता चल सकेगा की मरीज ने दवा ले ली है।
जारी होगी संख्यात्मक डिजिटल आईडी :-----
निक्षय पोर्टल-2 में यह व्यवस्था की गयी है कि टीबी मरीज के नोटिफिकेशन के साथ ही उसे 6 से 7 अंकों की एक डिजिटल आईडी आवंटित कर दी जाएगी। इस आईडी के जरिये देश के किसी भी कोने में टीबी मरीज के बारे में सारी जानकारी ली जा सकती है। इससे पता चल सकेगा कि उसका क्या-क्या इलाज हुआ है और फालोअप की क्या स्थिति है। मरीज भी इसके जरिये कहीं भी इलाज की सुविधा प्राप्त कर सकेगा।

मोबाइल और लैपटॉप पर भी होगा ऑपरेट : -----
निक्षय पोर्टल पहले केवल डेस्कटॉप पर ही ऑपरेट किया जा सकता था, किन्तु नए वर्जन में उसे मोबाइल और लैपटॉप पर भी ऑपरेट किया जा सकेगा। इससे यह फायदा होगा कि नोटिफिकेशन में होने वाला अनावश्यक विलम्ब ख़त्म हो जाएगा, क्योंकि अब कहीं भी बैठे-बैठे मरीज के नोटिफिकेशन के अलावा उसके इलाज की प्रगति के बारे में जाना जा सकेगा।

जानकारीपरक सामग्री भी पढ़ने को मिलेगी :-----
निक्षय पोर्टल-2 पर टीबी से सम्बंधित शोध, जरुरी जानकारियां और आंकड़े भी उपलब्ध होंगे, जिसे पढ़कर जानकारी को बढ़ाया जा सकता है। यह सामग्री इस दिशा में काम करने वालों के लिए बहुत ही उपयोगी साबित हो सकती है।
निक्षय पोर्टल में किये गए बदलाव का फायदा टीबी मरीजों के साथ ही डॉक्टरों को भी मिलेगा।अब मरीज के बारे में सारी जानकारी चंद मिनटों में सामने होगी, इससे इलाज में जहाँ मदद मिलेगी वहीँ मरीज को समय रहते अन्य सुविधाएँ भी मुहैया करायी जा सकती हैं। मुख्य रूप से मरीज के नोटिफिकेशन की समस्या जब ख़त्म हो जाएगी तो अन्य समस्याओं का समाधान अपने आप हो जाएगा।इस बारे में पोर्टल लांच होने के एक हफ्ते के भीतर प्रशिक्षण की भी व्यवस्था की जा रही है। इस तरह यह पोर्टल टीबी के खात्मे की दिशा में मील का पत्थर साबित होगा

रिपोर्ट:अनुज प्रताप सिंह

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