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मैनपुरी में मुआवजे के 11 करोड़ रुपये किसानों ने नारेबाजी कर जिला प्रशासन को लौटाए,

मैनपुरी
किसानों ने मुआवजे के 11 करोड़ लौटाए
गुरुवार को 11 करोड़ से अधिक का मुआवजा लेकर आए प्रशासनिक अधिकारियों को वापस लौटना पड़ा। किसानों ने प्रदर्शन किया और सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। किसानों ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार समान पक्षी विहार का मुआवजा नियम के अनुसार नहीं दे रही। किसानों से बात करने पहुंचे एसडीएम किशनी को किसानों ने अपनी मांगों का एक ज्ञापन भी दिया। एसडीएम से साफ कहा कि सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा उन्हें चाहिए अन्यथा सरकार की ईंट से ईंट बजा दी जाएगी।
गुरुवार को तहसील कार्यालय पर समान पक्षी विहार के किसानों को मुआवजा देने का कार्यक्रम प्रस्तावित था। सुबह 10 बजे भूमि अध्याप्ति अधिकारी, आगरा कार्यालय के अधिकारी, कर्मचारी मुआवजा लेकर तहसील पहुंच गए। लेकिन वहां पहले से सैकड़ों किसान जमा थे। किसानों ने मुआवजे को लेकर प्रशासनिक धोखेबाजी के आरोप लगाए और धरना शुरू कर दिया। इस दौरान कहा गया कि 1990 में किसानों की मर्जी के बिना समान पक्षी विहार के लिए 917 किसानों से 294.87 हेक्टेयर जमीन ले ली गई। लेकिन 27 सालों के लंबे अंतराल के बाद सरकार और मैनपुरी प्रशासन किसानों के साथ धोखा कर रहा है।
तो 1990 में क्यों नहीं दिया मुआवजा
आरोप लगाया कि 1990 की सर्किल दर के आधार पर किसानों को मुआवजा देने का ड्रामा हो रहा है। किसानों ने कहा कि अगर यही सब करना था तो 1990 में ही मुआवजा दिया जाता। किसान किसी भी कीमत पर 1990 की सर्किल दर का मुआवजा नहीं लेंगे। किसानों को वर्ष 2013 में बने मुआवजा कानून के हिसाब से सर्किल रेट का चार गुना मुआवजा ही चाहिए। किसानों की संख्या को लेकर भी पैदा हो गई है रार
मुआवजा को लेकर प्रशासन और किसानों के बीच रार सर्किल दर को लेकर ही नहीं है बल्कि किसानों की संख्या को लेकर भी पैदा हो गई है। 917 किसानों से जमीन ली गई। लेकिन 357 किसानों को ही मुआवजे के नोटिस दिए गए और इन्हीं किसानों को 111998429 रुपये मुआवजा देने के लिए अभिलेख तैयार किए गए हैं। सात दिन में मुआवजा देने का वादा कर आगरा से आयी टीम एकाउंट नंबर मांगती रही। लेकिन किसानों ने साफ इंकार कर दिया। सरकार 763920 प्रति हेक्टेयर की दर से मुआवजा देना चाहती है।
किसानों ने घोषित एवार्ड को मानने से किया इंकार किशनी। किसानों के हंगामे की खबर पाकर पहले से ही भारी पुलिस बल तहसील में तैनात कर दिया गया था। सीओसिटी राकेश पांडेय किशनी, बेवर, बिछवां और मैनपुरी से पुलिस बल लेकर तहसील पहुंच गए। एसडीएम अशोक प्रताप सिंह ने मौके पर जाकर किसानों से वार्ता की। एसडीएम ने अपनी मजबूरी बताई तो किसानों ने भी अपनी मजबूरी बता दी। मुआवजा वितरण पर बात नहीं बनी तो किसानों के प्रतिनिधि मंडल ने एसडीएम को अपनी मांगों का ज्ञापन दिया। किसानों ने 23 मई को मैनपुरी प्रशासन द्वारा जारी किए गए एवार्ड को भी मानने से इंकार कर दिया।
इस अवसर पर किसान घनश्यामदास गुप्ता, राघवेंद्र सिंह चौहान, प्रमोद यादव, सतीश यादव, प्रकाश यादव, राधेश्याम कठेरिया, मोतीलाल शुक्ला, धर्मेंद्र चौहान, शंकर चौहान आदि मौजूद रहे।
294.87 हेक्टेयर जमीन किसानों से ली गई
917 किसानों से ली गई पक्षी विहार की जमीन - 234 करोड़ रुपये दो साल से डीएम के खाते में पड़े - 357 किसानों को ही मुआवजे के नोटिस भेजे गए - 11 करोड़ का मुआवजा लेकर आए अधिकारी
61 हजार रुपये प्रति बीघा का दे रहे मुआवजा
रिपोर्ट:अनुज प्रताप सिंह

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