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हवा में उड़ गया अस्पताल का बोर्ड,और स्वास्थ्य सेवाएं

एटा के अलीगंज में एक सरकारी अस्पताल के मुख्य द्वार पर लगा बोर्ड तेज़ हवा चलने से उखड़ गया जो राह चलते एक व्यक्ति के सर पर जा लगा जिससे व्यक्ति गम्भीर रूप से घायल हो गया।
वीओ - दरअसल मामला बीती रात अलीगंज कस्वे का है जहां एक सरकारी अस्पताल के मुख्य द्वार पर लगा अस्पताल के नाम का बोर्ड तेज़ हवा चलने से कंक्रीट सहित उखड़ गया,
मामला उस समय और संगीन हो गया जब बोर्ड उखड़ कर राह चलते एक युवक अरमान पुत्र भूरे  के सिर पर जा लगा जिससे युवक को सर में गम्भीर रूप से चोट आई।यह देखते ही आसपास के लोगों ने उसके परिजनों को सूचना दी तत्काल उस युवक को अलीगंज के स्वास्थ्यकेन्द्र ले जाया गया मगर उस वक़्त स्वास्थ्य केन्द्र में  कोई डाक्टर मौजूद नहीं था।सूचना के काफी देर बाद डाक्टर अस्पताल पहुंचे मगर मानवता को शर्मसार कर डाक्टर ने घायल का स्वयं इलाज करना तक ज़रूरी नहीं समझा और बिना देखे ही चलते बने।
उधर बार्ड व्वाय मरहमपट्टी करता रहा मगर जब वार्डव्याय ख़ून बन्द नही कर पाया तो घायल के परिजनों ने प्राइवेट अस्पताल मे दिखाने के लिए बोला।
अस्पताल के इस रवैये से छुब्ध हो कर घायल युवक के परिजन घायल को लेकर डाक्टर की शिकायत करने थाने पहुंचे जहां पुलिस घायल युवक को प्राथमिक उपचार के लिए पुनः उसी अस्पताल में लाई जहाँ पुलिस के दखल के बाद घायल युवक का इलाज शुरू हुआ।
मगर इस बार भी घायल को वार्ड व्वाय का ही सहारा मिला डाक्टर साहब फिर भी नज़र नहीं आये।
सोचनीय बात यह है कि फिर इन सरकारी अस्पतालों के होने का क्या फायदा कि समय पर मरीज़ों को समुचित चिकित्सकीय सुविधाएं न मिल पाएं।
इस बाबत जब एक पत्रकार ने डाक्टर से उक्त घायल युवक के हाल के बारे में जानना चाहा तो  बजाय घायल का हाल बताने के डाक्टर उल्टा उस पत्रकार से उसकी डिग्री पूछ बैठे बोले तुम एक एमबीबीएस से बात कर रहे हो तुम्हारे पास क्या डिग्री है। मैं तुम्हें फोन पर क्यों बताऊं।
अब सवाल ये हैं कि डाक्टर साहब को इतना गुस्सा क्यों आ गया।आखिर डाक्टर साहब को फोन पर मरीज़ का हाल बताने में दिक्कत क्या थी।
मामला साफ है जब डाक्टर साहब ने घायल का अपने हाथों से इलाज किया ही नहीं तब वो क्या बता पाएंगे कि घायल का हाल कैसा है।
क्या विभाग ऐसे ग़ैर ज़िम्मेदार लोगों पर कोई कार्यवाही करेगा या फिर ये सिलसिला यूं ही चलता रहेगा और लोगों को  अपना इलाज करवाने के लिए इतनी जद्दोजहद करनी पड़ेगी। ये बड़ा सवाल है।
रिपोर्ट अनन्त मिश्रा

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