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अलीगंज स्कूल बस हादसा: विभागीय लापरवाही से बहाल हुए शिक्षा अधिकारी


शीतकालीन अवकाश की सूचना प्रसारित न करने के आरोप में किया गया था निलंबित
आरटीआई से हुआ खुलासा
एटा: मासूमों की मौत के गुनाहगार विभागीय लापरवाही से बहाल हो गए। शासन- प्रशासन की नजरों में जनाक्रोश थामने को शिक्षा विभाग ने आनन- फानन में तीन अधिकारियों को निलंबित कर दिया था, परन्तु जिस आरोप में तीनों निलम्बित किए गए वह कहीं भी टिक न सके और वह बहाल हो गए। विभाग ने घटना की मुख्य वजह को लेकर उन पर कोई आरोप तय तक नहीं किये थे। जिसके बाद विभागीय अधिकारियों की भूमिका संदेह के घेरे में आ गई है। आरटीआई से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है।
    बीते साल 19 जनवरी को अलीगंज में स्कूल बस - ट्रक की भीषण भिंडत हुई थी। हृदयविदारक इस घटना में 12 मासूमों सहित 13 लोगों की मौतें हुईं थीं, जबकि एक दर्जन से अधिक मासूम घायल हुए थे। इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तक ने गहरा दुःख व्यक्त किया था। घटना को लेकर शिक्षा विभाग पर  उंगलियां उठी थीं। जिसके बाद विभाग ने एनपीआरसी, एबीआरसी व खंड शिक्षा अधिकारी अलीगंज को तत्काल निलंबित कर दिया था। निलंबन आदेश में लगाए गए आरोपों में ही विभाग ने खेल कर दिया।
   सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत आरटीआई कार्यकर्ता सुनील कुमार को मिले अभिलेखों में तत्कालीन बीएसए आर. के. वर्मा ने निलंबित अधिकारियों पर जिलाधिकारी द्वारा घोषित किये गए शीतकालीन अवकाश की सूचना प्रसारित न करने का आरोप लगाया था, जबकि जिस स्कूल के मासूम बच्चे हादसे का शिकार हुए थे, वह बिना मान्यता के चल रहा था। बिना मान्यता के स्कूल संचालन को लेकर तत्कालीन बीएसए ने कोई आरोप तय नहीं किये। जबकि हाईकोर्ट से लेकर शासन तक कई बार बिना मान्यता के संचालित स्कूलों पर कार्यवाही को लेकर आदेश दे चुका है। शिक्षा का अधिकार अधिनियम में फर्जी स्कूलों पर कड़ी कार्यवाही का प्रावधान होने के बावजूद बिना मान्यता के स्कूल संचालित होता रहा और विभाग के अधिकारी सोते रहे। विभाग की इसी चालाकी का निलम्बित अधिकारियों को फायदा मिल गया और विभागीय जांच में शीतकालीन अवकाश की सूचना प्रसारित करने की बात कहकर बच गए।
   आरटीआई कार्यकर्ता सुनील कुमार कहते हैं कि मासूमों के असली गुनाहगार विभागीय अधिकारी हैं। यदि स्कूल संचालित नहीं हो रहा होता, तो यह हादसा नहीं होता। विभागीय अधिकारियों के खिलाफ आपराधिक मुकदमा बनता है। उन्होंने बताया कि विभागीय अधिकारियों पर आपराधिक मुकदमा दर्ज कराने को शासन को पत्र लिखेंगे।
स्कूल के मान्यता अभिलेख छिपा रहे बीएसए
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एटा- बेसिक शिक्षा विभाग के अधिकारी अभी भी मासूमों के गुनाहगारों को बचाने में जुटे हैं। वे स्कूल के मान्यता संबंधी अभिलेखों के साथ- साथ हादसे के अभिलेख नहीं दे रहे हैं। आरटीआई कार्यकर्ता सुनील कुमार ने 18 अप्रेल, 2017 को दो अलग- अलग आवेदन भेजकर बेसिक शिक्षा अधिकारी से जेएस विद्या निकेतन के मान्यता सम्बन्धी अभिलेखों, विभाग द्वारा दर्ज कराई गई रिपोर्ट एवं हादसे में निलम्बित अधिकारियों के विषय में जानकारी मांगी थी,परन्तु बीएसए ने आज तक स्कूल हादसे से जुड़े अभिलेख उपलब्ध नहीं कराए हैं, जबकि स्कूल हादसे में निलंबित हुए एनपीआरसी, एबीआरसी के निलंबन, बहाली आदेश की प्रतियां उपलब्ध करा दी हैं। खास बात तो यह है कि दोनों आवेदन एक ही दिन बीएसए को भेजे गए थे। आरटीआई कार्यकर्ता सुनील कुमार का कहना है कि विभाग जानबूझकर स्कूल से जुड़ी जानकारी छिपा रहा है। इसमें विभाग के अधिकारी फंस रहे हैं।

रिपोर्ट- सुनील कुमार

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