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यूपी के डीजीपी को नहीं पता, प्रदेश के कितने थाने चला रहे इंस्पेक्टर


आरटीआई से हुआ खुलासा
एटा: प्रदेश के कितने थाने इंस्पेक्टर चला रहे हैं, इसकी जानकारी प्रदेश के पुलिस मुखिया को नहीं है। आरटीआई से प्राप्त सूचना से यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। जबकि अन्य बिंदुओं पर मांगी गई जानकारी उपलब्ध करा दी गई है।
     प्रदेश के सभी थाने कई वर्ष पूर्व ही कोतवाली में बदल चुके हैं। इसके बाद भी उनमें इंस्पेक्टर की तैनाती नहीं हुई है। प्रदेश में सत्ता परिवर्तन के साथ ही राजनैतिक रसूख वाले दरोगा ही थाने की कमान संभालते रहे हैं। वहीं इंस्पेक्टरों को कार्यलयों अथवा कम महत्वपूर्ण स्थानों पर तैनाती दे दी जाती है। जिसके सम्बंध में जैथरा के आरटीआई एक्टविस्ट सुनील कुमार ने प्रदेश के पुलिस महानिदेशक से सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत 5 बिंदुओं पर सूचना मांगी थी। जिसमें यूपी पुलिस में इंस्पेक्टरों के स्वीकृत पदों की संख्या, कुल पुलिस थाना, पुलिस थानों में इंस्पेक्टरों के स्वीकृत पदों के सापेक्ष वर्तमान में तैनात इंस्पेक्टरों की संख्या तथा इंस्पेक्टरों की तैनाती के सम्बंध में समय- समय संवैधानिक संस्थाओं द्वारा निर्गत आदेशों की जानकारी मांगी थी। पहले तो एक माह तक कोई सूचना नहीं दी गई। प्रथम अपील के बाद मुख्यालय ने सूचना उपलब्ध कराई, वह काफी चौंकाने वाली निकली।
    पुलिस महानिरीक्षक / उपाधीक्षक स्थापना अनिल कुमार ने प्रेषित सूचना में बताया कि प्रदेश में निरीक्षकों के स्वीकृत पदों की संख्या पांच हजार है, जबकि थानों की संख्या 1463 है। पुलिस थानों में इंस्पेक्टरों के स्वीकृत पदों के सापेक्ष वर्तमान में तैनात इंस्पेक्टरों की संख्या के सवाल पर उन्होंने बताया कि यह सूचना धारित नहीं है। आवेदक जनपदों से सूचना प्राप्त कर सकता है। वहीं संवैधानिक संस्थाओं निर्गत आदेशों के सम्बंध में भी कोई जानकारी प्राप्त नहीं कराई गई। जबकि विधानसभा चुनाव के दौरान आयोग ने प्रदेश के तत्कालीन डीजीपी को प्रत्येक थाने में इंस्पेक्टर की तैनाती के आदेश दिए थे। दरोगाओं के थानेदारी संभालने पर पक्षपात के आरोप लगते रहे हैं। वहीं डीजीपी मुख्यालय के जवाब से भी साफ है कि जिले में थानों की कमान सत्ता पक्ष के स्थानीय नेताओं के इशारे पर ही सौंपी जाती है। ऐसे में वही दरोगा थानेदारी पाने में सफल हो जाते हैं, जिनकी राजनैतिक पहुंच और रसूख अच्छा होता है।
रिपोर्ट- सुनील कुमार




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