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एटा पीड़ित के प्रत्यावेदन पर दो सप्ताह में निर्णय लें प्रमुख सचिव- हाईकोर्ट, एसएसपी ने स्वतंत्र एजेंसी अथवा उच्चाधिकारी से जांच कराने को शासन को भेजा था पत्र

शासन के निर्णय न लेने पर पीड़ित ने हाईकोर्ट से लगाई थी न्याय की गुहार
एटा- नियम-कानूनों को ताक पर रख दागी दरोगा पर मेहरबानी बरसाने वाले तत्कालीन एएसपी पर शिकंजा कसना तय है। स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने को एसएसपी की तरफ भेजे गए पत्र पर शासन द्वारा कोई निर्णय न लेने पर पीड़ित ने हाईकोर्ट से न्याय की गुहार लगाई। हाईकोर्ट ने प्रमुख सचिव, गृह विभाग को पीड़ित के प्रत्यावेदन पर दो सप्ताह में निर्णय लेने का आदेश दिया है।
      जैथरा निवासी बिजेंद्र सिंह के साथ डकैती की वारदात होने पर मानवधिकार आयोग और सीओ के आदेश पर 18 दिन बाद रिपोर्ट दर्ज करने का मामला सपा सरकार में दब गया था, लेकिन सत्ता बदलते ही मामले ने तूल पकड़ लिया। बिजेंद्र की शिकायत पर हुई जांच में पूर्व अधिकारियों द्वारा जांच रिपोर्ट में दरोगा कैलाश चंद्र दुबे को बचाने के लिए दिए गए तर्क किसी के गले नहीं उतरे। अधिकारियों का पक्षपात भी सामने आया। 3 दिन एफआईआर विलम्ब से दर्ज करने के दोषी पर तत्काल एफआईआर दर्ज कराने, तो वहीं 18 दिन विलम्ब से अभियोग दर्ज करने वाले दरोगा पर मेहरबानी बरसाने जैसे मामले सामने आए।
      मामले को गंभीरता से लेते हुए एसएसपी अखिलेश चौरसिया ने प्रकरण की जांच किसी वरिष्ठ अधिकारी अथवा स्वतंत्र एजेंसी से कराए जाने के लिए शासन को पत्र भेजा था । एसएसपी ने शासन को प्रेषित पत्र में लिखा था कि तत्कालीन एएसपी विर्सजन सिंह यादव और एएसपी क्राइम अनूप कुमार ने दरोगा कैलाश चंद्र दुबे के खिलाफ अलग-अगल जांच की। इसके बाद भी जांच रिपोर्ट कट-पेस्ट जैसी बना कर दरोगा को बचाने का प्रयास किया गया। शिकायत में दोनों एएसपी पर कई गंभीर आरोप लगाए गए हैं। जिनकी जांच उच्चाधिकारी अथवा स्वतंत्र एजेंसी से कराया जाना आवश्यक है।
   एसएसपी के पत्र पर भी शासन ने उच्च अधिकारी अथवा स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराने को लेकर कोई निर्णय नहीं लिया। लगभग दो माह का समय बीत जाने पर भी जब शासन से कोई आदेश पारित नहीं किया गया, तब पीड़ित ने हाईकोर्ट से न्याय की गुहार लगाई। याचिका पर सुनवाई करते हुए न्यायाधीश कृष्णमुरारी एवं अखिलेश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने पारित आदेश में कहा है कि  पीड़ित दो सप्ताह में अपना प्रत्यावेदन सभी साक्ष्यों सहित प्रमुख सचिव, गृह विभाग को भेजेे एवं पीड़ित के प्रत्यावेदन मिलने के दो सप्ताह के अंदर प्रमुख सचिव, गृह विभाग कानून के अनुसार आदेश पारित करें। हाईकोर्ट के आदेश के बाद जिले के तत्कालीन एएसपी विसर्जन सिंह यादव, एएसपी अपराध अनूप कुमार, तत्कालीन क्षेत्राधिकारी अलीगंज धर्मसिंह मार्च्छल, तत्कालीन एसओ जैथरा कैलाश चंद्र दुबे एवं दरोगा मदनमुरारी द्विवेदी की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रहीं हैं।
रिपोर्ट- सुनील कुमार

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