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शासन को झूठी रिपोर्ट भेजने में फंसे सीओ,सीएम ने दिए जांच के आदेश,एडीजी से 15 दिन में मांगी कार्यवाही रिपोर्ट

एटा-जमानत पर बाहर युवक को जेल में बताकर अफसरों को झूठी रिपोर्ट भेजने के मामले में सीओ अलीगंज फंस गए हैं। फर्जी शिकायत निस्तारण पर आपत्ति लगने के बाद मुख्यमंत्री कार्यालय ने जांच के आदेश दिए हैं। अपर पुलिस महानिदेशक, आगरा को जांच सौंपकर 15 दिवस में आख्या मांगी है। शिकायत को गंभीरता से लेने की सख्त हिदायत दी गई है। सीएम ऑफिस के आदेश पर बैठी जांच की आंच एसएसपी ऑफिस तक पहुंचती नजर आ रही है। इन पर आँखें मूंदकर आख्या को स्वीकार कर उच्च स्तर पर प्रेषित करने का आरोप है। सीएम की सख्ती से महकमे में खलबली मच गई है।
     दरअसल, क्षेत्राधिकारी अलीगंज अजय भदौरिया ने आईजीआरएस पर दर्ज एक शिकायत की जांच में पीड़िता संतोष देवी के पति को जमानत पर होने के बाद भी जेल में निरुद्ध बताया है। जबकि उसका पति पिछले लगभग डेढ़ वर्ष से जमानत पर है। जांच के दौरान सीओ ने पीड़िता के बयान भी अंकित नहीं किये थे। कोई साक्ष्य भी संकलित नहीं किया था। प्रार्थना पत्र का अवलोकन न कर, उसकी विषयवस्तु व अनुरोध के विपरीत मनगढंत, भ्रामक व झूठी जांच रिपोर्ट तैयार कर एसएसपी को भेज दी थी। सीओ की जांच में और भी कई गम्भीर खामियां थीं, बावजूद इसके एसएसपी अखिलेश कुमार चौरसिया ने सीओ की रिपोर्ट आंखें बंद कर स्वीकार कर ली और उच्च स्तर पर प्रेषित कर शिकायत का फर्जी निस्तारण करा दिया था।
    सोशल मीडिया में ' आरोपी जमानत पर, पुलिस बोली जेल में' शीर्षक से यह खबर खूब वायरल हुई थी। योगी आदित्यनाथ के आदेशों को हवा में उड़ाने वाले अफसरों की कारगुजारियों को उल्लेखित किया था। सीओ ने अपने अधिकारिता क्षेत्र से परे जाकर इस मामले की जांच की, इसके बाद भी अधिकारी चुप्पी साधे रहे। सोशल मीडिया के माध्यम से मामला डीजीपी तक पहुंचा, परन्तु जिले के पुलिस अधिकारी कार्यवाही के नाम पर चुप्पी साधे रहे। अफसरों की संवेदनहीनता,लापरवाही व उदासीनता को प्रमुखता से उजागर किया। पीड़िता संतोष देवी ने इसकी शिकायत मुख्यमंत्री कार्यालय में कर दी । जिस पर गंभीर रूख अपनाते हुए मुख्यमंत्री कार्यालय ने अपर पुलिस महानिदेशक, आगरा को जांच के आदेश दिए हैं। आदेश में साफ कहा गया है कि प्रकरण को गंभीरता से लेते 15 दिन में आख्या प्रेषित करें। इस जांच की आंच एसएसपी ऑफिस तक पहुंचती नजर आ रही है। एसएसपी ऑफिस में अधीनस्थों पर विश्वास कर उनकी झूठी जांच रिपोर्टों को आँखें बंद कर स्वीकार किया जाता है और जब मामला फंसता है तो अधिकारियों को शासन की फटकार और कार्यवाही का सामना करना पड़ता है। 
लाल निशान, सी ग्रेड
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मुख्यमंत्री ऑफिस से इस प्रकरण में अधिकारियों की लापरवाही को लेकर सी ग्रेड दिया गया है। इससे साफ है कि मुख्यमंत्री ऑफिस अधिकारियों की कार्यप्रणाली से सन्तुष्ट नहीं है।
डीजीपी ऑफिस के ट्वीट पर नहीं की थी कार्यवाही
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एटा- 'आरोपी जमानत पर, पुलिस बोली जेल में' का मामला डीजीपी ऑफिस को भी ट्वीट के जरिये पहुंचाया गया था। डीजीपी ने एसएसपी को कार्यवाही के आदेश दिए थे। डीजीपी ऑफिस से आश्वासन भी दिलाया गया था कि इस पर कार्यवाही की जाएगी, परन्तु एक माह से अधिक समय बीत जाने के बाद भी जांचकर्ता सीओ की जिम्मेदारी व जवाबदेही तय कर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई है।
क्या है मामला
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एटा - कस्बा जैथरा में 6 वर्ष पूर्व 2011 में तीन लोगों की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी | जिसमें आवेदिका के पति एवं एक  मृतक सहित लगभग डेढ़ दर्जन लोगों पर मुकदमा लिखा गया था | जबकि घटना के समय आवेदिका का पति पुलिस अधिकारियों के साथ दूसरे थानाक्षेत्र में था | इसी आधार पर वर्ष 2012 में  शासन ने मुकदमा वापसी को जिला प्रशासन से रिपोर्ट मांगी थी | जिला प्रशासन ने तय बिंदुओं पर शासन को रिपोर्ट भेज दी थी | घटना की सीबीसीआईडी जांच होने के कारण शासन ने डीएम से सीबीसीआईडी की आख्या मांगी है | डीएम स्तर से एसपी, सीबीसीआईडी को वांछित आख्या भेजने हेतु लगातार पत्र भेजे जा रहे हैं, परन्तु सीबीसीआईडी द्वारा वांछित आख्या नहीं भेजी गई | जिसकी शिकायत पीड़िता ने आईजीआरएस पोर्टल पर  दर्ज कराकर वांछित आख्या भिजवाने की गुहार अधिकारियों से लगाई थी | इसी मामले में सीओ अलिगंज ने शिकायती प्रार्थना पत्र की विषयवस्तु के विपरीत झूठी, भ्रामक, गुमारहात्मक आख्या एसएसपी को प्रेषित की थी। एसएसपी ने आख्या स्वीकार कर उसे उच्च स्तर पर भेजकर शिकायत का फर्जी निस्तारण करा दिया था।-  
रिपोर्ट-सुनील कुमार

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