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एटा मे वीआईपी भ्रष्टाचार की डीएम ने शुरू की जांच,हाईकोर्ट ने 3 माह में जांच करने का दिया आदेश

तहसीलदार व कानूनगो की बीच बातचीत का ऑडियो हुआ था वायरल
एटा - हाईकोर्ट के आदेश पर वीआईपी भ्रष्टाचार की जांच शुरू हो गई है। डीएम ने पीड़ित व गवाहों के बयान दर्ज किये हैं। हाईकोर्ट ने तीन माह में जांच करने का आदेश दिया है। वीआईपी भ्रष्टाचार की जांच की आंच डीएम कार्यालय तक पहुंच गई है।
    गत वर्ष मार्च माह में सदर तहसील के तत्कालीन तहसीलदार ठाकुर प्रसाद व पिलुआ सर्किल के कानूनगो सत्यवीर की बातचीत का ऑडियो वायरल हुआ था | कानूनगो ने तहसीलदार पर हर माह वीआईपी के नाम पर दस हजार रुपये मांगने का आरोप लगाया था | ऑडियो में तहसीलदार ने जिलाधिकारी के स्टेनो से मिलकर वीआईपी व्यवस्था करने को कहा था | पैसा न देने पर भू माफिया में नाम दर्ज  कर राजस्व बोर्ड भेजने की धमकी दी गई थी | मीडिया में भी मामला काफी उछला था। जिसके बाद तत्कालीन डीएम अजय यादव ने स्टेनो घनश्याम को अपने कार्यालय से हटाकर प्रकरण पर जांच बैठा दी थी | कोई कार्यवाही न होने पर कानूनगो सत्यवीर सिंह ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर न्याय की गुहार लगाई। कोर्ट में ऑडियो की सीडी में दाखिल की गई। हाईकोर्ट ने भ्रष्टाचार से जुड़े मामले को गंभीरता से लेकर जिलाधिकारी को तीन माह में जांच करने के आदेश दिए। आदेश मिलते ही जिलाधिकारी अमित किशोर ने वीआईपी भ्रष्टाचार की जांच शुरू कर दी है। जिलाधिकारी ने पिछले दिनों कानूनगो को पत्र भेजकर शपथ पत्र, ऑडियो टेप व साक्ष्य मांगे थे। कानूनगो ने जिलाधिकारी को ऑडियो टेप की सीडी, शपथ पत्र आदि सौंप दिए। कानूनगो के समर्थन में तहसील सदर के ही चार और कानूनगो ने भी अपने शपथ पत्र डीएम को दिए हैं। जबकि एटा सदर में 7 कानूनगो हैं। उन्होंने बयान किया है कि तत्कालीन तहसीलदार ने वीआईपी के नाम पर दस-दस हजार रुपये की मांग की थी। जिलाधिकारी ने उनके कथन अंकित कर लिए हैं।
शासन की जांच में नहीं सुना था कानूनगो का पक्ष
एटा- हाईकोर्ट के आदेश से पूर्व जैथरा के आरटीआई एक्टविस्ट सुनील कुमार की शिकायत पर शासन ने इस मामले की जांच कराई थी। भ्रष्टाचार की जांच तहसील सदर के एसडीएम व एडीएम प्रशासन सतीशपाल ने की, परन्तु किसी भी जांच अधिकारी ने कानूनगो का पक्ष नहीं सुना। एडीएम ने तहसीलदार को क्लीन चिट देते हुए कानूनगो को षणयंत्र का आरोपी बताकर रिपोर्ट डीएम को भेज दी थी।ऑडियो टेपिंग की भी जांच नहीं कराई गई | जांच अधिकारी आरोपी पक्ष का कथन अंकित कर  एक पक्षीय जांच रिपोर्ट शासन व राजस्व परिषद को भेजते रहे | जांच अधिकारियों ने तहसीलदार का खुलकर बचाव किया है |
शासन ने अलग - अलग तलब की थी आख्या
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एटा- शासन ने प्रकरण को काफी गंभीरता से लिया था | इस मामले की जांच पुलिस और प्रशासन से अलग - अलग कराकर जांच रिपोर्ट मांगी गई | शासन के आदेश पर तत्कालीन एसएसपी अपर पुलिस अधीक्षक विसर्जन सिंह यादव से प्रकरण की जांच कराई | एएसपी ने प्रकरण जिलाधिकारी कार्यालय से जुड़ा होने पर अपना पल्ला झाड़ लिया और जिलाधिकारी कार्यालय से अग्रेत्तर कार्यवाही होने की आख्या लगाकर एसएसपी को रिपोर्ट प्रेषित कर दी |
बदलती रही जांच रिपोर्ट
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एटा - इस पूरे प्रकरण में अफसरों की जांच रिपोर्ट बदलती रही | आरटीआई एक्टविस्ट सुनील कुमार की पहली शिकायत पर मामले की जांच तत्कालीन एसडीएम सदर सुनील कुमार वर्मा ने की | उन्होंने अपनी जांच में पाया कि तत्कालीन तहसीलदार ठाकुर प्रसाद व कानूनगो सत्यवीर सिंह की कोई वार्ता नहीं हुई है | शिकायत को निराधार व असत्य करार दिया गया | आरटीआई एक्टविस्ट के  इस जांच रिपोर्ट पर आपत्ति लगाने के बाद मामले की पुनः जांच कराई गई | इस बार जांच तत्कालीन एसडीएम सदर रवि प्रकाश श्रीवास्तव ने की | उन्होंने अपनी जांच  में पाया कि तहसीलदार ठाकुर प्रसाद की कानूनगो से वार्ता हुई थी | यह वार्ता विभागीय कार्यों के संपादन के विषय में हुई थी | रूपयों के लेन- देन के परिप्रेक्ष्य में कोई वार्ता नहीं हुई | शासन स्तर से एक बार जिला प्रशासन की आख्या ख़ारिज हो गई थी | शासन ने डीएम व एसएसपी की संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त आख्या मांगी थी | बाद में शासन ने प्रकरण की जांच राजस्व परिषद को सौंप दी थी| 
रिपोर्ट- सुनील कुमार
मो.   8273773931

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