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एटा सपा सरकार मे चहेते दरोगा को बचाने के लिए एएसपी ने अपनाए हथकंडे,18 दिन तक बिना स्टाफ चला एक थाना,न एनसीआर लिखी गई और न ही एफआईआर

एटा- सपा सरकार में जिले का  जैथरा थाना बिना पुलिस स्टाफ के 18 दिन तक चलता रहा। इन दिनो़ इस थाने पर न कोई एफआईआर लिखी गई और न ही एनसीआर। पूरा थाना स्टाफ बीमार रहा और अधिकारियो को नही लगी भनक
    जी हां तत्कालीन एएसपी विसर्जन सिंह यादव ने 18 दिन तक रिपोर्ट नहीं दर्ज करने की शिकायत पर एक दागी कैलाश दुबे दरोगा को बचाने के लिए अपनी जांच रिपोर्ट में यही लिखा है।
     दागी दरोगा को बचाने के लिए तत्कालीन एएसपी विसर्जन सिंह यादव ने अपनी जांच में ऐसे-ऐसे तथ्य ढुङ्ग के लिखे कि सच्चाई की कसौटी पर दूर तक नहीं उतरे खरे।
    सपा में ऊंची पहुंच के चलते खुद की कलम फंसने की चिंता किए बगैर एएसपी दागी दरोगा में लगे रहे।सपा सरकार में कई मामलों में हुई जांच रिपोर्टों में अफसरों की करतूत अब सामने आई है।
एटा- जैथरा के बिजेंद्र सिंह के साथ डकैती की वारदात मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने कार्रवाई के आदेश दिए थे। तत्कालीन सीओ धर्मसिंह मार्च्छल ने एसओ कैलाश चंद्र दुबे को 18 अगस्त 2016 को रिपोर्ट दर्ज करने के आदेश दिए लेकिन एसओ ने 18 दिन बाद 3 सितंबर, 2016 को रिपोर्ट दर्ज की।
    जब पीड़ित ने विलंब से रिपोर्ट दर्ज करने की शिकातय कर कानूनी कार्रवाई की मांग की तो तत्कालीन एएसपी ने मामले की जांच खुद कर ली। एएसपी विसर्जन सिंह यादव ने 18 दिन बाद रिपोर्ट दर्ज करने के पीछे एसएसपी को भेजी और रिपोर्ट में लिखा कि है सीओ और आयोग का आदेश पहुंचने के वक्त थाने का पूरा स्टाफ डेंगू, चिकुनगुनिया और बुखार की चपेट मे भी बता दिया
      अब एएसपी की जांच रिपोर्ट पर यकीन किया जाए तो साफ है कि पूरा थाना 18 दिन तक बिना स्टाफ के चलता रहा और 18 दिन थाने में रिपोर्ट और एनसीआर दर्ज नहीं हुई। ऐसे में तत्कालीन एएसपी बिसर्जन सिंह यादव की जांच रिपोर्ट सवालों के घेरे में है।
यानी जैथरा थाने में तैनात पुलिस स्टाफ गंभीर बीमारियों से पीड़ित रहा और पुलिस अफसरों को भनक तक नहीं लगी। अब सवाल उठता है जब थाने का पूरा स्टाफ बीमार था और जनता से जुड़े कामकाज बंद थे तो मामले से शासन को अवगत क्यों नहीं कराया गया।
खुद की जांच रिपोर्ट बदलते रहे एएसपी
एटा- दागी दरोगा के मामले में तत्कालीन एएसपी और एएसपी अपराध अपनी जांच बदलते रहे। पीड़ित की शिकायत पर दोनों अधिकारी पीड़ित द्वारा कोई पूर्व सूचना थाना पर न दिए जाने का कथन अंकित कर सीओ के आदेश के अनुपालन की आख्या देते रहे। जब पीड़ित ने थाने जाने सबूत सीएम ऑफिस भेजे, तो दोनों अधिकारी बैकफुट पर आ गए और रिपोर्ट बदल कर लिखा कि पीड़ित के परिजनों का मेडिकल पुलिस ने ही कराया था, जबकि पहले की रिपोर्ट मे दोनों अफसर मेडिकल कराने को नकारते रहे।
एएसपी ने खुद ही कर ली अपनी जांच
एटा- दागी दरोगा पर मेहरबानी बरसाने व पक्षपात पूर्ण कार्यवाही किये जाने पर पीड़ित ने तत्कालीन एएसपी विसर्जन सिंह यादव की शिकायत मुख्यमंत्री से की। जांच के आदेश हुए। शिकायत प्राप्त होते ही एएसपी ने अपनी जांच खुद कर क्लीनचिट प्राप्त कर ली।
रिपोर्ट- सुनील कुमार, एटा
मो.8273773931

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