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निर्भीक होकर करें,हस्तक्षेप बर्दाश्त नही-डीएमनाबार्ड की अध्यक्षता में ग्रामों में किसानों का वर्कशॉप अवश्य कराये

एटा-
मंगलवार को कलैक्ट्रेट सभागार में ग्लैण्डर्स एवं फार्सी बीमारी के बचाव हेतु पशुपालन विभाग द्वारा पशु चिकित्साधिकारियों, पशुधन प्रसार अधिकारियों हेतु एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजित किया गया। प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ डीएम विजय किरन आनन्द ने विधिवत मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण एवं द्वीप प्रज्ज्वलित कर किया गया। डीएम ने सभी पशु चिकित्साधिकारियों, पशुधन प्रसार अधिकारियों आदि सभी को निर्देश दिये कि पशु चिकित्सालयों में अवस्थापना सुविधाओं की कमी न रहें, जो भी छोटी मोटी कमियां हैं उन्हें तत्काल दूर किया जाये, अतिशीघ्र ही पशु चिकित्सालयों का भी निरीक्षण मेरे द्वारा किया जायेगा। आदर्श अस्पताल बनायें, अवस्थापना सुविधाओं की कमी नहीं रहनी चाहिए। अस्पतालों के ओपीडी, आईपीडी में सुधार लायें। नाबार्ड की अध्यक्षता में ग्रामों मे कैम्पों का आयोजन किया जाये, जिसमें उद्यान, पशुपालन, कृषि आदि संबंधित विभागों की सहभागिता के साथ ही किसानों, पशुपालकों की सहभागिता शतप्रतिशत सुनिश्चित कराई जाये। निर्भीक होकर कार्य करें, प्रशासन का पूर्ण सहयोग मिलेगा, यदि लापरवाही हुई तो कार्यवाही भी होगी।
          डीएम विजय किरन आनन्द ने प्रशिक्षण कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि ग्लैण्डर्स एवं फार्सी बीमारी अश्व प्रजाति के पशुओं यथा घोडा, खच्चर एवं गधों मेें पाई जाती है, जिसकी रोकथाम अतिआवश्यक है, सभी पशु चिकित्साधिकारी समय से अपने पशु चिकित्सालय पर उपस्थित रहकर पशुपालकों की समस्याओं को गंभीरता से सुनें, उनकी जिज्ञासाओं को दूकर किया जाये। इसके साथ ही नियमित रूप से बहुउददेशीय शिविर ग्रामों में जाकर आयोजित करें, ताकि पशु पालक अधिक से अधिक लाभान्वित हों, पशुओं का अधिक से अधिक संख्या में बीमा करायें। पशु चिकित्सालयों पर बैनर, पोस्टर व पम्पलेटस साधारण भाषा में लगायें, ताकि पशु पालक आसानी से समझ सके। ग्लैण्डर्स बीमारी बरखोलडेरिया मैलिआई जीवाणु से होती है जिसका कोई उपचार नहीं है। यह बीमारी अश्वों के साथ-साथ मनुष्यों में भी हो सकती है तथा उपचार उपलब्ध न होने के कारण यह बीमारी जानलेवा है। अश्वों में यह बीमारी तीन प्रकार की होती है, पल्मोनरी फार्म, स्किन फार्म, नेजल फार्म। इस बीमारी में अश्वों में तेज बुखार होता है, नाक से पीला स्त्राव आता है तथा नाक में घाव तथा त्वचा में गॉंठ पड जाती है, जिनसे पीला मवाद निकलता है। पशु को खॉंसी व घस्का तथा न्यूमोनिया होता है। ग्लैण्डर्स नोटिफाईड बीमारी है, जिसका अर्थ है कि बीमारी होने पर तत्काल उसकी सूचना पषु पालन विभाग के माध्यम से जिला मजिस्ट्रेट को उपलब्ध कराई जाये। पीडित पशुओं को यूथेनेशिया (दर्द रहित मृत्यु) दिया जाता है। ग्लैण्डर्स व फार्सी एक्ट 1899 के अन्तर्गत यूथेनेशिया दिये गये पशु का मुआवजा पशु स्वामी को दिया जाता है। घोडे हेतु मुआवजा की धनराशि 25000.00 रू0 व गधे व खच्चर हेतु 16000.00 दिया जाता है।





      
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