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अखिलेश का नया कलेबर कभी अपने थे आज पराये हो गए,दूर तक नही हो रहे चाचा के दर्शन,होर्डिंगों लगे नही फोटो,सत्ता पाने के लिए पराये हुए अपने

लखनऊ-
अखिलेश यादव की नए कलेवर वाली कब्ज़ा की गयी समाजवादी पार्टी की एटा और कासगंज की सभी 5 रैलियों में एक चीज जो सबमे सामान दिखी वो यह कि किसी भी रैली में कही भी शिवपाल यादव का कोई जिक्र या चर्चा तक नहीं आया। किसी भी समाजवादी से दिखने वाले बैनर पोस्टर तक में गलती से भी शिवपाल यादव की तस्वीर नहीं छपी। सभी पारिवारिक समाजवादी सदश्यो मुलायम,अखिलेश,रामगोपाल,डिम्पल और यहां तक कि आजम खान तक के फोटो होर्डिंग्स पर दिखाई दिए उन पराये कांग्रेसियो सोनिया,राहुल,प्रियंका तक के फोटो मंच के बैनर पर दिखाई दिए जिनको कल तक सपाई कोसते थे, परंतु वह सच्चा खाटी समाजवादी कही नहीं दिखाई दिया जिसने अपने खून और पसीने से सीच कर इस समाजवादी पौधे को इतने बड़े वट वृछ का रूप दिया जिसकी छाया में ऐसे तथाकथित समाजवादी तक पुष्पित और पल्लवित हो रहे हैं जिन्हें सत्ता रूपी थाली विरासत में परसी परसाई मिल गयी।
सपा सुप्रीमो मुलायम सिंह यादव ने भी कई बार समाजवादी पार्टी को खड़ा करने का जिक्र करते हुए शिवपाल यादव के अमिट योगदान का जिक्र किया है ।  जब मुलायम सिंह यादव जेल में थे तब पार्टी के कामो को   जिम्मेदारी  से आगे बढ़ाने का काम शिवपाल यादव ने किया है ऐसा मुलायम सिंह यादव का कहना है।
परंतु समाजवाद का असली चेहरा देखो जिस व्यक्ति ने समाजवाद का पौधा अपने खून पसीने से सींच कर बड़ा किया उसे उसकी छाव भी मयस्सर नहीं।
आखिर ऐसा क्या कसूरहै शिवपाल यादव का जिससे उन्हें उन्ही की समाजवादी पार्टी से दूध की मक्खी की तरह से निकाल कर फेंक दिया गया। आखिर शिवपाल को बेइज्जत करने वाला समाजवाद का ये कौन सा ककहरा है जिसे समाहवादी कहलाने वाली नई उम्र की नई फसल पुराने समाजवादियो पर हंटर की तरह इस्तेमाल कर रही है।
आँखे बंद करके ज़रा शिवपाल यादव के उस चेहरे को याद भर करिये जिसपर समाजवादी पार्टी को अंकुरित करने से लेकर पुष्पित और पल्लवित करने की इबारत साफ़ नजर आती है । आज वो चेहरा तथाकथित समाजवादी  परिवारवाद की भेंट चढ़कर चतुर और चालाक समाजवादियो के भवर जाल में फसकर खुद अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने को मजबूर है । क्या इंसान की यादास्त इतनी कमजोर है कि वो शिवपाल यादव जैसे समाजवादी पार्टी की रीढ़ रहे नेता को  कथित अवसर वादी समाजवादियो की कुटिल चालो में आकर रातोरात  भूल जाएगा। यदि ऐसा है तो मुझे आप से कुछ नहीं कहना है ।
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