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अखिलेश ने चाचा शिवपाल समेत 4 मंत्रियों को किया बर्खास्त,रामगोपाल पार्टी से निष्कासित,

लखनऊ-
समाजवादी पार्टी और मुलायम सिंह यादव के परिवार में चल रही कलह थमने का नाम नहीं ले रही। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव के बीच चल रहा घमासान खुलकर सामने आ गया। अखिलेश यादव ने आज चाचा शिवपाल सिंह यादव समेत 4 मंत्री ओम प्रकाश सिंह, नारद राय, शादाब फातिमा को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया। जया प्रदा से भी मंत्री पद का दर्जा छीना गया।,

मुलायम सिंह यादव के परिवार में चल रही कलह थमने का नाम नहीं ले रही। उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव के बीच चल रहा घमासान खुलकर सामने आ गया। अखिलेश यादव ने आज चाचा शिवपाल सिंह यादव समेत 4 मंत्री ओम प्रकाश सिंह, नारद राय, शादाब फातिमा को मंत्रिमंडल से बर्खास्त कर दिया। जया प्रदा से भी मंत्री पद का दर्जा छीना गया। साथ ही सीएम ने कहा, जो लोग अमर सिंह का साथ दे रहे हैं, उन सबको बर्खास्त कर दूंगा,

मुलायम सिंह यादव ने रामगोपाल यादव को समाजवादी पार्टी से निकाला। रामगोपाल यादव सपा से 6 साल के लिए निष्कासित किये गये। रामगोपाल पर शिवपाल का आरोप, भाजपा से मिले हुए हैं और नेताजी के खिलाफ साजिश कर रहे हैं। रामगोपाल की साजिश को अखिलेश नहीं समझ रहे हैं। रामगोपाल यादव का पार्टी में कोई योगदान नहीं है। सीबीआई से बचने के लिए रामगोपाल भाजपा से मिले हुए हैं। ये हमेशा तिकड़म करते रहते हैं।

मंत्री पद से बर्खास्त होने के बाद शिवपाल यादव ने कहा, मुझे बर्खास्त होने की चिंता नहीं है। मुझपर सीधे आरोप लगाया गया। पार्टी को कमजोर करने की साजिश हो रही है। चुनाव का वक्त है, जनता के साथ चलेंगे। नेताजी ने बड़ी मेहनत से पार्टी खड़ी की है। सपा के कुछ नेता पार्टी को कमजोर करना चाहते हैं। नेताजी के नेतृत्व में चुनाव लड़ेंगे,
 मुलायम सिंह यादव और शिवपाल सिंह यादव के साथ बैठक हुई,

भाजपा-
अखिलेश यादव सरकार अल्पमत में आई। राज्यपाल इस सरकार को कोई नीतिगत निर्णय लेने से पहले सदन में बहुमत साबित करने को कहें, या मुख्यमंत्री इस्तीफा दें। 

उत्तर प्रदेश के समाजवादी परिवार में चाचा-भतीजे के बीच जारी वर्चस्व की लड़ाई में अब तक की सबसे बड़ी ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ में आज मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने चाचा वरिष्ठ काबीना मंत्री शिवपाल यादव समेत 4 मंत्रियों को बर्खास्त कर दिया। सपा के सूत्रों ने यहां बताया कि विधानमण्डल दल की बैठक में मुख्यमंत्री ने शिवपाल समेत कई मंत्रियों को मंत्रिमण्डल से बर्खास्त करने का एलान किया है।

राजभवन की ओर से यहां जारी एक बयान में इसकी पुष्टि करते हुए बताया गया कि राज्यपाल राम नाईक ने मुख्यमंत्री की सिफारिश पर मंत्री शिवपाल सिंह यादव, नारद राय, ओम प्रकाश सिंह तथा स्वतंत्र प्रभार की राज्यमंत्री सैयदा शादाब फातिमा को पद से बर्खास्त कर दिया है। बयान के अनुसार इन चारों मंत्रियों को पदमुक्त करने सम्बन्धी फाइल राज्यपाल के अनुमोदन के लिये आज ही राजभवन को प्राप्त हुई थी।

मुख्यमंत्री ने शिवपाल के साथ अपनी जंग को नया रूप देते हुए यह कदम ऐसे वक्त उठाया है जब सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव सोमवार को सपा विधायकों, मंत्रियों और विधान परिषद सदस्यों के साथ महत्वपूर्ण बैठक करने जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक अखिलेश ने बैठक में कहा कि कुछ बाहरी लोग उनके तथा उनके पिता सपा प्रमुख मुलायम सिंह यादव के बीच दूरियां बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि अखिलेश ने सपा राज्यसभा सदस्य अमर सिंह का नाम लेते हुए कहा कि जो भी मंत्री या नेता उनका साथ दे रहा है, उन्हें बर्खास्त कर दिया जाएगा। बैठक के दौरान अखिलेश के समर्थकों ने उनके आवास के बाहर अमर सिंह के खिलाफ नारेबाजी की।

उधर, मंत्रिमण्डल से शिवपाल की बर्खास्तगी के बाद बड़ी संख्या में उनके समर्थक उनके सरकारी आवास के बाहर एकत्र हो गये। ताजा मामले में सपा के मुखिया मुलायम सिंह यादव को चिट्ठी लिखकर पार्टी प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल सिंह यादव के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले विधानपरिषद सदस्य उदयवीर सिंह को कल सपा से निकाल दिया गया। सिंह को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव का करीबी माना जाता है।

उदयवीर सिंह ने अपने निष्कासन के बारे में कहा था कि नेताजी (मुलायम) पार्टी के संरक्षक है। मुझे पूरा भरोसा है कि वह सबके साथ न्याय करेंगे, मुख्यमंत्री (अखिलेश यादव) के साथ भी न्याय करेंगे। अफसोस इस बात का है कि नेताजी को मंचों से गाली देने वाले लोग इस वक्त पार्टी में मौजूद हैं और पत्र लिखने वाले शुभचिंतकों को पार्टी से निकाला जा रहा है। नेताजी जब भी कभी गम्भीरता से विचार करेंगे तो जरूर सोचेंगे।

अपने चार पन्ने के पत्र में उन्होंने किसी का नाम लिये बगैर यहां तक कह दिया था कि अखिलेश के खिलाफ साजिश में मुलायम की पत्नी, बेटा और बहू भी शामिल है और शिवपाल सपा मुखिया की पत्नी की राजनीतिक महत्वाकांक्षा का चेहरा हैं। उन्होंने सपा मुखिया पर एकतरफा बातें सुनकर कार्रवाई करने का आरोप लगाते हुए अनुरोध किया था कि वह सपा के संरक्षक बन जाएं और अखिलेश को पार्टी का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दें।

शिवपाल और मुख्यमंत्री के बीच तल्खी का दौर गत जून में माफिया-राजनेता मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी की अगुवाई वाले कौमी एकता दल (कौएद) के शिवपाल की पहल पर सपा में विलय को लेकर अखिलेश की नाराजगी के बाद शुरू हो गया था। कुछ दिन बाद इस विलय के रद्द होने से यह कड़वाहट और बढ़ गयी। शिवपाल ने कुछ दिन बाद प्रदेश में जमीनों पर अवैध कब्जों के मुद्दे पर इस्तीफे की पेशकश की थी। गत 15 अगस्त को सपा मुखिया ने मैदान में उतरते हुए शिवपाल की हिमायत की थी और कहा था कि अगर शिवपाल पार्टी से चले गये तो सपा टूट जाएगी।

अखिलेश ने 12 सितम्बर को भ्रष्टाचार के आरोप में तत्कालीन खनन मंत्री गायत्री प्रजापति तथा एक अन्य मंत्री राजकिशोर सिंह को बख्रास्त कर दिया था। ये दोनों ही सपा मुखिया के करीबी माने जाते हैं। मुलायम के कहने पर बाद में मंत्रिमण्डल में प्रजापति की वापसी हो गयी। इसे मुख्यमंत्री अखिलेश के लिये करारा झटका माना गया था। अखिलेश को प्रदेश अध्यक्ष पद पर वापस लेने से सपा मुखिया के इनकार से पार्टी के युवा नेताओं में नाराजगी की लहर दौड़ गयी और वे पार्टी राज्य मुख्यालय के सामने सड़क पर उतर आये। इसके बाद तीन विधान परिषद सदस्यों समेत कई युवा नेताओं को अनुशासनहीनता के आरोप में पार्टी से निकाल दिया गया।

हाल में मुलायम द्वारा कौएद के सपा में विलय को बहाल किये जाने सम्बन्धी शिवपाल की घोषणा को अखिलेश की एक और पराजय के तौर पर देखा गया। पार्टी में अखिलेश के हिमायती गुट का आरोप है कि यह सब मुख्यमंत्री की छवि को धूमिल करने और सपा में उनकी स्थिति कमजोर करने के लिये किया जा रहा है। मुख्यमंत्री के पैरोकार समझे जाने वाले पार्टी महासचिव रामगोपाल यादव ने पिछले दिनों सपा मुखिया को लिखे पत्र में कहा था कि मुलायम शिवपाल को निष्कासित युवा नेताओं को पार्टी में वापस लेने को कहें और विधानसभा चुनाव के टिकटों के बंटवारे में मुख्यमंत्री को भी अधिकार दें।

उधर सपा नेता रामगोपाल यादव ने कार्यकर्ताओं को चिट्ठी लिखकर समर्थकों और विरोधियों के बीच स्पष्ट लाइन खींच दी है। समाजवादी पार्टी में दो फाड़ होता दिख रहा है। इस चिट्ठी में रामगोपाल यादव ने लिखा है कि सुलह की कोशिश अखिलेश की यात्रा रोकने की साजिश है। कार्यकर्ता अखिलेश के साथ जुटें। अखिलेश विरोधी विधानसभा नहीं पहुंच पाएंगे। रामगोपाल ने साथ ही लिखा है कि अखिलेश की यात्रा विरोधियों के गले की फांस बन गई है। मध्यस्थता करने वाले दिग्भ्रमित करने की कोशिश कर रहे हैं। जहां अखिलेश हैं, जीत वहीं है।

रामगोपाल यादव ने लिखा है कि हम चाहते हैं कि राज्य में समाजवादियों की सरकार बने जबकि वो यानि (शिवपाल और उनके समर्थक) चाहते हैं कि हर हाल में अखिलेश चुनाव हारें। हमारी सोच पॉजिटिव है, जबकि उनकी सोच नेगेटिव है। रामगोपाल ने लिखा है कि अखिलेश के साथ वो लोग हैं, जिन्होंने पार्टी के लिए खून पसीना बहाया है, अपमान सहा है, जबकि उधर के लोग वो हैं, जिन्होने हजारों रुपया कमाया है, व्यभिचार किया है और सत्ता का दुरूपयोग किया है।

रामगोपाल ने लिखा है कि कुछ लोग गलतबयानबाजी कर रहे हैं। हमारी सोच सकारात्मक है, जबकि विरोधियों की सोच नकारात्मक है। वो अखिलेश को हराने की साजिश रच रहे हैं। सुलह की कोशिश के जरिए अखिलेश की यात्रा रोकने की साजिश की जा रही है।रामगोपाल ने लिखा कि अखिलेश का विरोध करने वाले विधानसभा का मुंह नहीं देख पाएंगे। न डरें, न विचलित हों। जहां अखिलेश-वहां विजय। उन्होंने कार्यकर्ताओं से अखिलेश के समर्थन में जुटने की अपील की है ताकि अखिलेश की फिर सरकार बने।

अखिलेश यादव ने रविवार को विधायकों और समर्थकों की बैठक भी बुलाई है। इस बैठक में शिवपाल समर्थक विधायकों-नेताओं को नहीं बुलाया गया है। बैठक में उदयवीर सिंह, सुनील साजन, आनंद भदौरिया, संजय लाठर भी शामिल होंगे। पार्टी से निकाले गए सभी नेता बैठक में शामिल होंगे। उदयवीर को कल ही पार्टी से बर्खास्त किया गया था। उन्होंने ही मुलायम सिंह को चिट्ठी लिखी थी जिसमें अखिलेश की सौतेली मां साधना गुप्ता का जिक्र था।

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