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वाह रे शासन, अनेक घरों के बुझ गए चिराग, सजा सिर्फ चंद दिनों का निलंबन प्रशासन की जांच पूर्ण होने तक का नहीं किया इन्तजार

अभी भी शराब कांड के असली गुनहगारों तक भी नहीं पहुंची है जांच की आंच

एटा- प्रशासनिक जांच पूर्ण होने से पहले ही शराब कांड में निलंबित अधिकारी हुए बहाल । इससे तो साफ झलक रहा है कि अधिकारी कितने रसूखदार हैं । रह गई बेचारी जनता, उनका चंद लाख मुआवजा देकर उनका मुहं बंद करा दिया गया । नेता भी कम नहीं निकले, किसी ने संसद में मामला उठाकर यह जताने की पुरजोर कोशिश की, कि वे ही अपनी जनता के असली हितैषी है, तो कोई असली दोषियों को पकड़ने के लिए सीबीआई जांच की मांग तक सीमित रहा, तो किसी ने चंद रुपयों की बोली से दर्जनों घरों के चिरागों, जीवनसाथी, व वीर की बोलती बंद कर दी । अब सब नेता शांत हो गए हैं । अब न कोई सीबीआई जांच की मांग करता नजर आ रहा है और न कोई सदन का इसे मुद्दा बना रहा है । अब सब एक भूली बिसरी कहानी की तरह सब घटना को भूलते जा रहे हैं । हाँ, अभी एक समय और आएगा उन उजले घरों के दर दस्तक देने का, वो समय होगा वोटों की राजनीती का ।
    अधिकारी इतनी जल्दी कैसे बहाल हो गए । असली आरोपी क्यों नहीं पकड़े गए? सिर्फ मोहरों तक ही पुलिस क्यों सीमित रही? ऐसे अनेक सवाल हैं जिन पर कोई बोलने वाला नजर नहीं आ रहा है । जिम्मेदार अधिकारियों की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है ।

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