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एटा में नक्सा बाबू MM ओझा को पत्नी के जेबर गिरबी रख दी थी रिस्वत

एटा-
सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार की जड़े किस कदरमजबूत है कि बिना रिश्वत की भेट चढ़ाए आम आदमी काकोई काम नहीं हो सकता भले ही इसके लिए सरकार केराजस्व को कितनी ही बड़ी क्षति क्यों ना हो लेकिन रिश्वतखोरबाबूओं की जेबें भरनी चाहिए। मोटी मोटी पगार पाने वालेकर्मचारी बिना रिश्वत लिए कोई काम नहीं करना चाहते। जीहॉं हम बात कर रहे है एटा का जिलाधिकारी कार्यालय जोकिस तरह भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है इसकी बानगी एकबार फिर देखने को मिली जब नक्शा पास करने के लिए दसहजार रुपये रिश्ववत लेते हुए नक्शा बाबू एम एम ओझा कैमरेमें कैद हो गया। दरअसल ये पूरा मामला शहर कोतवाली केसुनहरी नगर निवासी विजय गुप्ता का है जो अपने मकान कानक्शा पास कराने के लिए नक्शा विभाग में गये तो उनसेनक्शा पास कराने के नाम पर नक्शा बाबू एम एम ओझा नेपचास हजार रुपये मॉंगे गये। छह महीने तक चक्कर लगातेके बाद इतना पैसा देने में असमर्थता व्यक्त करने के बाद बातपच्चीस हजार रुपये में बात तय हो गयी और नक्शा बाबू नेदस हजार रुपये पहले ही ले लिए थे। घूसखोर बाबू ने बाकीके 15 हजार रुपये देने के बाद ही  नक्शा पास होने की बातपीड़ित से कही। थक हार कर पीड़ित ने घूसखोर बाबू कोसबक सिखाने की सोची और दस हजार रुपये देते हुए कैमरेमें कैद कर लिया। लेकिन सरकारी विभाग में सही काम केलिए भी रुपये की भेंट चढ़ाने के लिए विजय गुप्ता को अपनीपत्नी के जेवर तक गिरवी रखने पड़े। सरकारी विभाग मेंचढ़ावे के बिना कोई काम नहीं हो सकता ऐसे में सवाल ये किआखिर ऐसे भ्रष्ट लोगों के खिलाफ कोई कार्यवाई क्यों नहीहोती। यही वजह है कि कार्यवाई न होने से जहॉं ऐसे लोगों केहौसले बुलन्द है वहीं दूसरी ओर आम जनता सही काम केलिए भी रिश्वत की भेंट चढ़ाने को बेबस है।

 

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