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गाज़ियाबाद पत्रकार वैभव शर्मा को फर्जी मामले में जेल भेजने का मामला कोर्ट में विवेचक आज भी नही हुआ पेश ,अदालत ने लगाई फटकार

विवेचक की अनुपस्थिति को कोर्ट ने माना कोर्ट की अवमानना 

 कोर्ट ने अभियोजन पक्ष को दिया हुक्म मंगलवार को मुरादनगर एसएचओ व्यक्गित रूप से हों पेश

गाजियाबाद। उप्र के प्रमुख समाचार चैनल ,केन्यूज के ब्यूरो प्रमुख वैभव शर्मा को फर्जी तथ्यों व तर्को के आधार पर मुरादनगर पुलिस द्वारा की गयी गिरफतारी के मामले में जांच कर रहे विवेचक आज भी कोर्ट में पेश नही हुए। विवेचक की कोर्ट में पेश न होने के पीछे की बहाने बाजी को लेकर अपर मुख्य न्यायाधीश सुश्री मौसमी मधेशिया ने आज कडी नाराजगी व्यक्त करते हुए शासकीय अधिवक्ता से कहा कि वह अपने मुवक्किल मुरादनगर के एसएचओ सुबोध सक्सैना को व्यक्तिगत रूप से मंगलवार को कोर्ट में पेश होने के लिए कहे। अदालत ने कडा रूख करते हुए कहा कि इस मामले के विवेचक बहादुरसिंह यादव कोर्ट में पेश होने का  कोई न कोई बहाना लगाकर बचने की कोशिश कर रहे है। गौर तलब है कि गाजियाबाद के सीएमओ अजेय अग्रवाल को यह जानकारी मिली थी कि मुरादनगर के  मंगलम अस्पताल में गर्भ में पल रहे भ्रूण के लिंग की जांच करने का गैर कानूनी ढंग से कार्य हो रहा है । इस मामले में मंगलम अस्पताल को सील करने के लिए पिछले दिनों सीएमओं पत्रकारों के एक दल के साथ जैसे ही वहां पहुचे तो अस्पताल के मालिक डीसी कंसल ने अपने व्यापार मंडल के कुछ साथियों व भाजपा कार्य कर्ताओं की भीड को विरोध करने के लिए बुला लिया। हालांकि इसी दौरान सीएमओ ने अस्पताल में रखी अल्ट्रासाउन्ड व अन्य मशीनो को सीलकर अस्पताल मालिक के खिलाफ नोटिस चस्पा कर दिया। इसी बीच अस्पताल के मालिक डा0 डीसी कंसल और उनके साथियों ने इस पूरे प्रकरण को कवरेज कर रहे पत्रकारोेेेेेेेेेें व सीएमओ पर हमला बोल दिया। सीएमओ व कुछ पत्रकार किसी तरह उग्र भीड से बच निकले ,लेकिन भीड ने वैभवशर्मा को दबोचा और पीट-पीट कर अधमरा कर दिया।  उससे कैमरा और आईडी आदि भी छीन ली गयी। मजे की बात यह है कि अस्पताल ने अपनी चमडी बचाने के लिए उल्टे पत्रकार पर रंगदारी वसूलने का मामला मुरादनगर थाना में दर्ज कराकर वैभव को पुलिस के हवाले कर दिया। 

वैभव के अधिवक्ता विनोद भारद्वाज ने कोर्ट के बाहर संवाददाताओं को बताया कि हम कोर्ट में केवल यह पूछ रहे है कि पत्रकार वैभवशर्मा अगर रंगदारी वसूल रहे थे तो इस मामले के विवेचक बहादुरसिंह यादव कोर्ट में पेश होकर रंगदारी वसूलने के सबूत पेश करे ,यदि विवेचक सबूत पेश नही करते है तो अदालत सबूत के अभाव में रंगदारी वसूलने की आईपीसी की धारा 386 को रदद कर इस पूरे मामले को रदद करे । उन्होने बताया कि विवेचक अपनी करतूत पर पर्दा डालने के लिए कोर्ट के आदेश के बावजूद कोर्ट में पेश न होने का बहाना लगा रहा है, जो कोर्ट की अवमानना है। आज कोर्ट ने भी अपने निर्णय में साफगोईसे लिखा है ।  

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