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बारांवकी में बेशर्मी की हद पार,दर्द से कराहती माँ पर,आखिर ठहाके जो भरते डाक्टर

बाराबंकी-
सीमएओ साहब प्राइवेट अस्पताल खुलवाने का लाइसेंस जो मिल रहा है ! उसपर  न आपका न आपके विभाग के नियम बदल सकता है ! दर्द एक गर्भवती मां से पूछिए डाक्टरों से नहीं,दर्द उस हालात से पूछिए अस्पताल से नहीं,आखिर दिमांग की ऐसी हमारी कौन सी नस दब गयी है कि इतना कुछ होने के बाद भी हम क्यों नहीं सुधर रहे है !  अगर ये कहा जाये तो गलत नहीं होगा डाक्टर नहीं डकैत बैठे है कुछ सामुदायिक स्वस्थ्य केंद्रों पर ! बेशर्मी की हदें पार करने वाले डाक्टरों का मोटी तनख्वाह लेने के बाद भी उनका पेट नहीं भर रहा है ! रही कसर संविदा पर तैनात डाक्टरों की वो या तो अपना खुद क्लीनिक चला रहे है,या फिर नर्सिंग सहित हॉस्पिटल चला रहे है ! जहाँ कभी-कभी ख़बरें आती है कि मरीजों को अपनी चार पहिया से लादकर अपने हॉस्पिटल में ले आते और अगर कोई कमी रह भी गयी तो उनके अस्पताल तक पहुँचाने का कोरम दलाल द्वारा जिला अस्पताल से मरीजों को चोरी कर प्राइवेट अस्पतालों तक पहुंचाने की पूरी कोशिश की जाती है ! जहाँ इलाज के नाम पर लूट रहे है,उनसे मोटी रकम लेकर उन्हें सकुशल भेज दिया जाता है  ! ऐसे में सतरिख के स्वास्थ्य केंद्र की तस्वीर इस बात पर मुहर लगाती है कि मरता क्या न करता कि अंतः दर्ज से कराहती रही गर्भवती,लेकिन नहीं आए डॉक्टरअस्पताल के कर्मचारियों से लेकर चिकित्सक तक मनमानी कर रहे हैं। अस्पताल में आने वाले मरीज चिकित्सकों का इंतजार करते रहते हैं। और इलाज के अभाव में दर्द भी सहते रहते हैं।मरीजोें का समय पर इलाज नहीं मिल पा रहा है। सोमवार की सुबह एक महिला दो घंटे तक डिलेवरी के इंतजार में तड़पती रही, लेकिन कोई महिला चिकित्सक नहीं आई। बाद में एक आया ने उसका प्रसव कराया। बंकी ब्लॉक के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र जाटा बरौली में सोमवार टीम ने जायजा लिया तो यहां पर अधीक्षक डॉ. ओमप्रकाश कुरील, डॉ. वर्षा वर्मा, डॉ. अविनाश उपाध्याय, एएनएम आदि लोग नदारद रहे।चिकित्सक के मौजूद नहीं रहने से मरीज इधर-उधर भटकते रहे। प्रसव पीड़ा से परेशान सोनी देवी पत्नी मोलहेराम निवासी निबहरी पुरवा अस्पताल पहुंची और एएनएम व महिला चिकित्सक का इंतजार करती रही।दो घंटे बाद महिला के कराहने की आवाज सुन वार्ड में तैनात आया मीना देवी आई और उस महिला को किसी तरह कमरे के अंदर ले जाकर डिलेवरी कराई। इसी तरह तिंदवानी गांव निवासी लक्ष्मी देवी को एक सप्ताह पूर्व डिलेवरी हुई थी लेकिन दर्द के कारण सोमवार सुबह अस्पताल दवा लेने आई थी।लेकिन महिला चिकित्सक के नहीं मिलने के कारण दर्द से छटपटाती रही और वापस चली गई। तिंदवानी गांव की ही निवासी सविता डिलेवरी की जांच कराने आई थी। घंटो इंतजार के बाद महिला चिकित्सक के नहीं मिलने पर मायूस होकर वापस चली गई।अस्पताल में चिकित्सक डॉ. सौरभ शुक्ला मरीजों का उपचार करते दिखाई दिए। अस्पताल सूत्रों का कहना है कि अधीक्षक एक बजे के आसपास आते हैं। और एक घंटे बाद चले जाते हैं जिस कारण कर्मचारी भी मनमानी करते हैं। चिकित्सक व कर्मचारियों की मनमानी मरीजों पर भारी पड़ रही है। अधीक्षक से लेकर अधिकांश चिकित्सक अस्पताल न पहुंचने के लिए सेटिंग किए हुए हैं। जिस कारण चिकित्सक सीएचसी नहीं पहुंच रहे हैं और उसके बदले में अधीक्षक मोटी रकम भी वसूल रहे हैं। जिसका खामियाजा यहां आने वाले मरीजों को उठाना पड़ रहा है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इस ओर ध्यान नहीं दे रहे हैं । डाक्टर तो चुल्लू भर पानी में डूब चुके लेकिन हम कितने पानी में डूबेंगे चलिए इस घटना के बाद मिलते-जुलते रटे रटाये बयान पर डॉ. सतीश चंद्रा, सीएमओ की पोटली में क्या है जान लेते है ! इनके मुताबिक सीएचसी में अगर महिला डॉक्टर नहीं थी और इस कारण आया को प्रसव कराना पड़ा तो पूरे मामले की की जांच कर चिकित्सकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी । हालाँकि ये भविष्य में कार्यवाही से पहले उनका फोन बज सकता है !

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