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रामवृक्ष बँदूकचीयो और लठैत चमचों से घिरे रहने वाला रामवृक्ष क्या इतना कमज़ोर या बेवकूफ था जो ऊपलौ के ढेर में जलकर मर जायेगा

शासन द्वारा रामवृक्ष यादव के मारे जाने की पुष्टि ने एक बार फ़िर साबित कर दिया कि जनता मरे तो मरने दो, अधिकारी मरते हैं तो मरने दो लेकिन
यू पी सरकार में बैठे मंत्रियों या ये कहें कि सरकार के मुखियाओं के पालतू गुण्डों और भू माफियाओं पर आँच तो दूर उसकी तपन भी नहीं आनी चाहिये ।
रामवृक्ष जैसे दरिन्दे की मौत की घोषणा भी इसी षडयंत्र का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जिसके बाद निश्चिततौर पर उसकी फाइल बन्द कर दी जायेगी जिसके चलते शासन और प्रशासन की उसे गिरफ्तार करने की कवायद और जवाबदेही भी स्वतः ख़त्म हो जायेगी । लेकिन कुछ सवाल हैं जो इस दरिन्दे की मौत को लेकर हैं ।

सवाल नम्बर 1 :-
हर समय बँदूकचीयो और लठैत चमचों से घिरे रहने वाला रामवृक्ष क्या इतना कमज़ोर या बेवकूफ था जो ऊपलौ के ढेर में जलकर मर जायेगा ?

सवाल नम्बर 2 :-
शासन पर वो कौन सा सूक्ष्मदर्शी यंत्र है जिसने बिना किसी फोरेंसिक जाँच अथवा DNA टेस्ट के एक दर्जन जली हुई लाशों में से रामवृक्ष को पहचान लिया ?

सवाल नम्बर 3 :-
यदि ऐसा कोई यंत्र है भी तो बाकी जली हुई लाशों के नाम की सूची सार्वजनिक क्यों नहीं की गयी ?

सवाल नम्बर 4 :-
यदि रामवृक्ष मारा गया तो उसकी लाश को मीडिया और जनता के सामने क्यों नहीं लाया गया ?

CM साहब आप अशिक्षित होते तो मान लिया जाता कि आपके चमचे या सम्माननीय परिवारीजन अथवा मंत्रीगण आपको गुमराह कर रहे हैं लेकिन अफसोस की बात हैं कि शिक्षित होते हुए भी आप ये साबित करना नहीं चाहते कि आप अशिक्षित नहीं ।
कहीं ऐसा न हो कि ये अपराधी प्रेम आपकी सरकार के ताबूत में आखिरी कील का किरदार निभा बैठे ।
हालाँकि इसमें कोई सन्देह रह नहीं गया है ।

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