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एटा 35 साल से फर्जी दस्ताभेजो को लगा बना नायब तहसीलदार मुन्ना भाई जमशेद अलाम

एटा में फर्जी दस्तावेजों के सहारे ही मुन्ना भाई ने 35 सालों से ज्यादा नौकरी कर डाली। ये मुन्ना भाई है नायब तहसीलदार सदर जमशेद आलम। आर टी आई से मिली सूचना के बाद राजस्व विभाग ने इसकी जॉंच जिलाधिकारी को दी है,लेकिन सत्ता में अपनी पहुंच और रसूख के चलते अधिकारी भी अपने चहेते नायब तहसीलदार को बचाने में जुटे है। ना सिर्फ फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी पाने बल्कि अपने पद का दुरुपयोग करते हुए इस मुन्ना भाई ने करोड़ों की अकूत संपत्ति भी बटोरी। एटा से इस पूरे मामले का खुलासा किया शाइन न्यूज़ ने

जरा गौर से देखिए इस शख्श को - न्याय की कुर्सी पर बैठा ये शख्श है नायब तहसीलदार सदर जमशेद आलम। जी हॉं इन महाशय ने अपनी हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा के फर्जी दस्तावेज लगाकर पूरी नौकरी ही कर डाली। अब अगले साल रिटायर हो रहे जमशेद आलम के पास भी फर्जी दस्तावेज लगाकर नौकरी करने के सवाल पर चुप्पी साधे हुए है। दरअसल आपको बता दें इस मुन्ना भाई ने जो इंटरमीडिएट की मार्क शीट लगाई है उसका रोल नं0  339244 है वो हाई स्कूल का रोल नं0 है ना कि इंटरमीडिएट का जो कामेशवर सिंह पुत्र छितेश्वर सिंह को हाईस्कूल की परीक्षा के लिए आवंटित किया गया था जिसने महावीर सिंह इंटर कालेज बादिलपुर जिला बलिया में परीक्षा दी थी और वो फेल हो गया था। जमशेद आलम ने 1978 में इंटरमीडिएट की परीक्षा जिस राजकीय दीक्षा विधालय गंजडुंडवारा से दर्शाई है उस विधालय को हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षा आयोजित करने का अधिकार ही नहीं था और ये बीटीसी ट्रेनिंग स्कूल था। इस मुन्ना भाई ने इंटरमीडिएट परीक्षा में सप्लीमेंट्री परीक्षा में जो रोल नं0 22287 - 339242 दर्शाई है वो कृष्ण पाल सिंह चौहान का है जो दयानंद स्मारक इंटर कालेज मैनपुरी को अंग्रेजी विषय हेतु आवंटित किया गया था जिसमें कृष्ण पाल सिंह चौहान ने परीक्षा ही नहीं दी थी। मार्कशीट में हेराफेरी कर जमशेद आलम ने अपना विषय नागरिक शाश्त्र देना दिखाया है जबकि ये अंग्रेजी की सप्लीमेंट्री थी। आरटी आई से मिली सूचना में माध्यमिक शिक्षा परिषद ने इसके फर्जी दस्तावेजों को फर्जी करार देते हुए सत्यापित प्रति भी दी है और इसके फर्जी दस्तावेजों के सहारे नायब तहसीलदार के पद पर काबिज इस मुन्ना भाई के पास कोई जवाब नहीं है।
इस मुन्ना भाई ने फर्जी दस्तावेजों के सहारे 35 सालों से ज्यादा नौकरी कर डाली और अपने पद का दुरुपयोग करते हुए इसने ना सिर्फ कराड़ों की संपत्ति भी बनाई। ईटीवी ने इस मामले पर जिलाधिकारी से बात की तो कैमरे से बचते हुए उन्होंने जॉंच की बात कहकर अपने चहेते मुन्नाभाई को बचाने की कोशिश की बल्कि मामले की लीपापोती कर डाली और इस मामले पर कुछ भी कहने से इंकार कर दिया।

अनिल कुलश्रेष्ठ,  आर टी आई/याचिकाकर्ता

भले ही इस मामले की जॉंच राजस्व विभाग ने डीएम को दी है और डीएम ने ए डी एम फाईनेंस राजेश कुमार को जॉंच दी है जो इस समय सीडीओ के पद पर है लेकिन जब इस पूरे मामले में इनके फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी पाने की पुष्टि हो चुकी है तो फिर ये कैसे अपने पद पर बने हुए है ये समझ से परे। एक लम्बे समय से चल रही इस जॉंच में अधिकारी इस मुन्ना भाई को बचा रहे है?  अब देखना ये है कि फर्जी दस्तावेजों के सहारे नौकरी पाने वाले इस शख्श ने ना सिर्फ एक योग्य उम्मीदवार को सेवा में आने से रोका बल्कि अपने पद पर रहते हुए करोड़ों की अकूत संपति बनाने वाले इस मुन्ना भाई के खिलाफ क्या कार्यवाई होती है.

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