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यूपी के 4 आईपीएस ऑफिसर जिनके नाम से अपराधियों की हो जाती हैं पैंट गीली

लखनऊ-
यूं तो उत्तर-प्रदेश (यूपी) विधानसभा चुनाव में एक साल से ज्यादा का वक़्त बचा हुआ है, लेकिन मुख्य विपक्षी दल बसपा और भाजपा अभी से हर प्रेस कांफ्रेंस में अपराध की घटनाओं को प्रमुखता से उठाती रही हैं। इससे यह तो साफ हो गया है कि विधानसभा चुनाव में क्राइम का मुद्दा प्रमुखता से उछाला जाएगा। ऐसे में हम आपको यूपी के उन काबिल आईपीएस ऑफिसरों के बारे में बताएंगे, जिनके चलते यहां क्राइम का ग्राफ घटा था और इनके नाम मात्र से कुख्यात अपराधियों की भी पैंट गीली हो जाती हैं।

नवनीत सिकेरा : ये वो आईपीएस हैं जिनका नाम सुनते ही बड़े-बड़े गैंगस्टर के पसीने छूटने लगते हैं। आईपीएस नवनीत सिकेरा अब तक 60 से ज्यादा एनकाउंटर कर चुके हैं। इसी तेजतर्रार आईपीएस ने कुख्यात गैंगस्टर रमेश कालिया के आतंक को ख़त्म किया था। नवनीत सिकेरा की अगुवाई में पुलिस ने बारातियों का वेश बदलकर रमेश कालिया को मौत के घाट उतारा था। नवनीत सिकेरा ने ही यूपी में पहली बार महिला हेल्पलाइन 1090 प्रोजेक्ट शुरू किया था, जो बाद में पूरे राज्‍य में लागू किया गया था। यूपी में एक ऐसा भी वक़्त था जब बाहुबलियों और कुख्यात अपराधियों के सताए लोग थाने के बजाय नवनीत सिकेरा के पास पहुंचते थे।

अरुण कुमार : इस रियल लाइफ के आईपीएस ऑफिसर की जिंदगी पर फिल्म भी बन चुकी है। यूपी के आईपीएस अरुण कुमार की अगुवाई में ही एसटीएफ का गठन किया गया था। एसटीएफ ने पूर्वांचल से संगठित अपराध को करीब-करीब ख़त्म कर दिया था। अरुण कुमार के नाम सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि इन्होने ही तब के कुख्यात गैंगस्टर श्रीप्रकाश शुक्ला का गाजियाबाद में एनकांउटर किया था। बताया जाता है कि श्रीप्रकाश शुक्ला ने तत्कालीन मुख्यमंत्री कल्याण के मर्डर की सुपारी ले रखी थी।

अमिताभ यश : आईपीएस अमिताभ यश ने एसटीएफ में रहते हुए 36 से ज्यादा एनकाउंटर किए थे। अमिताभ आम जनता के बीच में काफी लोकप्रिय थे, क्योंकि वे हर एनकाउंटर की कार्रवाई में खुद ही टीम को लीड करते थे, साथ ही ये अपराधियों से जुड़ी सुचनाएं स्थानीय लोगों से ही जुटाते थे। इनकी आक्रामक शैली के चलते इन्‍हें ज्यादातर समय एसटीएफ में ही रखा गया। कहा जाता है कि अमिताभ यश मूलरूप से बिहार के थे, इसलिए ये यूपी में संगठित अपराध की बारिकियों को जल्द समझ जाते थे।

अनंत देव : अगर आप हिंदी प्रदेशों से हैं और आपका जुड़ाव ग्रामीण परिवेश है तो तय मानिए की आपने बचपन में चंबल के डाकूओं की कहानियां सुनी होगी। आपको जानकर हैरत होगी की आईपीएस अनंत देव ही वे ऑफिसर हैं जिन्होंने चंबल में डाकूओं के आतंक को ख़त्म करने में अहम भूमिका निभाई। यूं तो अनंत देव की अगुवाई में पुलिस ने कई छोटे डाकूओं का सफाया किया, लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा तब मिली जब इन्होने कुख्यात डाकू ददुआ और ठोकिया को मार गिराया था।

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