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नई दिल्ली सरकारी कर्मचारियों द्वारा डाली जाने वाले आरटीआई आवेदनों पर हो रही है रोक लगाने की तैयारी

नई दिल्ली-
सरकारी कर्मचारियों द्वारा अपने ही मामलों से जुड़ी अपडेट जानकारी हासिल करने के लिए डाली जाने वाली आरटीआई आवेदनों पर सरकार अंकुश लगाने की तैयारी कर रही है।
    दरअसल आरटीआई के जरिए सरकार के तमाम विभागों से सवाल पूछने वाले लोगों में 10 पर्सेंट सरकारी कर्मचारी ही होते हैं। लेकिन सरकार अब इन लोगों पर रोक लगाने की योजना बना रही है। सरकार कर्मचारियों की ओर से आरटीआई दाखिल किए जाने को लेकर कड़े नियम बनाने की योजना बना रही है। सरकार का कहना है कि निजी मामलों को आंतरिक तौर पर ही सुलझाना लिया जाना चाहिए, इसे बढ़ाने की मंजूरी नहीं दी जानी चाहिए।
     कर्मचारियों की ओर से ज्यादातर आरटीआई ट्रांसफर, एरियर्स, सैलरी और अन्य चीजों के बारे में जानकारी के लिए दायर की जाती हैं। इन आरटीआई पर केंद्रीय सूचना आयोग भी संबंधित विभागों से पूरी जानकारी नहीं निकाल पाता है और उसे कड़ी मशक्कत करनी पड़ती है। सरकारी सूत्रों ने कहा कि यह मामला हाल ही में मुख्य सूचना आयुक्त आरके माथुर और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के सचिव संजय कोठारी के बीच हालिया मुलाकात के दौरान उठा था। एक सूत्र के मुताबिक दोनों विभागों के बीच तय हुआ कि सरकार को आदेश जारी करना चाहिए कि सभी विभाग अपने स्तर पर कर्मचारियों की समस्याओं को निपटाएं, उनके सवालों का जवाब दें और जरूरी काउंसलिंग करें। यदि कोई कर्मचारी अपनी नौकरी, सैलरी, पेंशन और अन्य मामलों की जानकारी चाहता है तो उसे पूरा अधिकार है।' क्योंकि फिलहाल विभागों में कर्मचारियों की समस्याओं का निपटारा मुश्किल ही हो पाता है, इसके चलते वह केंद्रीय सूचना आयोग का रुख करते हैं। एक एजेंसी की स्टडी के मुताबिक 2011-13 के दौरान सरकारी कर्मचारियों की ओर से जो आरटीआई दायर कर जो सूचनाएं मांगी गई थीं, उनमें से 49 पर्सेंट ऐसी थीं, जिनके बारे में विभाग की ओर से पहले ही ऐलान कर दिया जाना चाहिए था। इसके अलावा 18 पर्सेंट सूचनाएं ऐसी थीं, जो सूचना मांगे बिना ही दे दी जानी चाहिए थीं। केंद्रीय सूचना आयोग के पास फिलहाल 34,469 अपील और शिकायतें लंबित हैं।

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