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नई दिल्ली डिफेंस मिनिस्टर मनोहर पर्रिकर ने शुक्रवार को कहा कि भारत सियाचिन से अपनी आर्मी को नहीं हटाएगा।

नई दिल्ली-
डिफेंस मिनिस्टर मनोहर पर्रिकर ने शुक्रवार को कहा कि भारत सियाचिन से अपनी आर्मी को नहीं हटाएगा। इसकी वजह है कि जैसे ही इस स्ट्रैटेजिक लोकेशन को खाली किया जाएगा, वैसे ही दुश्मन (पाकिस्तान) उस पर कब्जा कर सकता है। >तो हमें कई जिंदगियां खोनी पड़ेंगी...

- डिफेंस मिनिस्टर ने लोकसभा में कहा- "यदि हम इस जगह को खाली करते हैं, तो दुश्मन उस पर कब्जा कर सकता है।"
- "अगर ऐसा होता है तो हम कई और जिंदगी खो देंगे। हम पहले भी 1984 (सियाचिन विवाद) को भुगत चुके हैं।" 
- उन्होंने कहा, "मैं जानता हूं कि हम इसकी कीमत चुका रहे हैं। मैं अपने जवानों को सलाम करता हूं। लेकिन हमें अपनी पोजिशन को मेनटेंन रखना होगा।" 
- "हम मुख्य स्ट्रैटेजिक लोकेशन पर हैं। यह पोजिशन स्ट्रैटेजिक तौर पर बहुत महत्वपूर्ण है।" 
- बता दें कि सियाचिन ग्लेशियर के सबसे ऊंचे प्वाइंट साल्टोरो पर इंडियन आर्मी तैनात है। उसकी ऊंचाई 23,000 हजार फीट है।
- पिछले दिनों सियाचिन में आए एवलांच में 10 जवानों की मौत हो गई थी।

>कब आया था एवलांच?

- 3 फरवरी को सियाचिन आर्मी कैम्प के पास सुबह साढ़े आठ बजे के करीब एवलांच आया था। 
- अपने बेस कैम्प से पैट्रोलिंग के लिए निकले एक जेसीओ समेत 10 जवानों का ग्रुप बर्फ के नीचे दब गया था।
- दरअसल, ग्लेशियर से 800 x 400 फीट का एक हिस्सा दरक जाने से एवलांच आया था।
- यह हिस्सा ढह जाने के बाद बर्फ के बड़े बोल्डर्स बड़े इलाके में फैल गए।
- इनमें से कई बोल्डर्स तो एक बड़े कमरे जितने थे।
- इसी के बाद शुरू हुआ दुनिया के सबसे ऊंचे बैटल फील्ड सियाचिन ग्लेशियर में 19500 फीट की ऊंचाई पर रेस्क्यू ऑपरेशन।

>32 साल में 915 जवानों की मौत

- पर्रिकर ने बताया कि सियाचिन में पिछले 32 सालों में 915 जवान शहीद हुए हैं। यानी हर साल 28 जवानों की मौत हुई है। आज यह नंबर घटकर 10 पर आ गया है।
- पर्रिकर ने बताया कि सियाचिन में जवानों को लगातार मेडिकल सपोर्ट दिया जाता है।
- सर्दी से बचने के लिए 19 तरह के कपड़े प्रोवाइड किए जाते हैं। स्नो स्कूटर भी दी जाती है।
- उन्होंने कहा कि सप्लाई में कोई कमी नहीं है। लेकिन नेचर पर पूरी तरह से जीत हासिल नहीं कर सकते।

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