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ऐसे पहचाने fb फ्रेंड्स की असली और फेक आईडी,नही तो हो सकती हो जेल

एेसे पहचानें facebook पर फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजने वाले की ID असली है या FAKE

 

भोपाल-
अगर आपको फेसबुक पर किसी की फ्रेंड्शिप रिक्वेस्ट मिली है, तो थोड़ा सतर्क हो जाएं! पहले उस ID को अच्छे से जांच लें जब यह कन्फर्म हो जाए कि, फलां सर/मैडम सही पर्सन हैं, तो ही उनकी फ्रेंडरिक्वेस्ट एक्सेप्ट करें। वर्ना जाने-अनजाने आप किसी बड़ी मुसीबत में पड़ सकते हैं।साइबर एक्सपर्ट प्रशांत पांडे बता रहे हैं फेक आईडी की पहचान...

 

कुछ उदाहरण...

 

केस 1: उज्जैन निवासी 20 वर्षीय युवती भोपाल के निजी मेडिकल कॉलेज में MBBS छात्रा है। दो महीने पहले उसने अपनी फेसबुक प्रोफाइल हैक होने की शिकायत सायबर पुलिस से की थी। आईपी एड्रेस के आधार पर पुलिस ने उसके पड़ोस में रहने वाले सौरभ जैन को गिरफ्तार किया था। 

 

केस 2: भोपाल के एक व्यापारी ने अपनी बेटी की फर्जी आईडी बनाए जाने की शिकायत सायबर पुलिस से की थी। इसमें लगातार अश्लील कमेंट किए जा रहे थे। इस मामले में पुलिस ने 19 वर्षीय शाहबाज खान और 20 वर्षीय उर्फान खान को पकड़ा था।

 

केस 3: भोपाल के अयोध्या नगर निवासी एक इंजीनियरिंग छात्र ने दो महीने पहले अपनी फर्जी प्रोफाइल बनाए जाने की शिकायत की थी। उसकी प्रोफाइल अबू शर्मा के नाम से बनाकर मजाक उड़ाया जा रहा था। पुलिस ने इस मामले में उसके साथ पढ़ने वाले पंकज कुमार को गिरफ्तार किया था।

 

 

केस 4 : पिछले महीने दिल्ली की क्राइम ब्रांच पुलिस ने पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई को गोपनीय जानकारी देने के आरोप में इंडियन एयरफोर्स से बर्खास्त अधिकारी रंजीत केके को गिरफ्तार किया था। उसने यूके की एक महिला(फेक आईडी) के झांसे में आकर फेसबुक के जरिए खुफिया जानकारी लीक कर दी थी। 

 

केस 5 : वर्ष, 2014  में पंजाब पुलिस ने भोपाल के कुछ युवकों को गिरफ्तार किया था। इन्हें एक पाकिस्तानी महिला (फेक आईडी) फेसबुक के जरिए दोस्ती के जाल में फंसाया था। बाद में इन्हें काले बिच्छुओं की तस्करी में शामिल कर लिया।

 

यह हो सकती है सजा

-कम्प्यूट, इंटरनेट, डिजिटल डिवाइसेज, वर्ल्ड वाइड वेब आदि के जरिए किए जाने वाले अपराधों का साइबर क्राइम कहा जाता है।-बिरले मामलों में आतंकवाद निरोधक कानून भी लागू किए जा सकते हैं।-आईटी अधिनियम 2000 की धारा 65 के तहत कम्प्यूटर सोर्स दस्तावेजों से छेड़खानी करने और धारा 66 के तहत कम्प्यूटर सिस्टम को हैक करने पर 3 साल कारावास और दो लाख रुपए जुर्माने की सजा है। -अधिनियम की धारा 67 के तहत इलेक्ट्रोनिक रूप से अश्लील सूचना प्रकाशित करने पर पहले अपराध में 5 साल तक कारावास व एक लाख जुर्माना तथा दूसरे अपराध में दस साल तक कारावास और दो लाख रुपए जुर्माना हो सकता है। -फेक आईडी के रूप में प्रदर्शित करने पर धारा 71 के तहत और किसी की निजता का हनन करने पर धारा 72 के तहत दो साल तक की सजा और एक लाख जुर्माना हो सकता है। 

( विजय खत्री AIG साइबर सेल, भोपाल के अनुसार)

 

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