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सोसल मीडिया पर रहेगी पुलिस की पैनी नजर

सोशल मीडिया पर प्रदेश की शांति व्यवस्था एवं साम्प्रदायिक सद्भाव को प्रभावित करने वाली सामग्री पर रहेगी पुलिस की पैनी नजर
आपत्तिजनक एवं भड़काऊ सामग्री ब्लॉक कराने सहित आईटी एक्ट व भादवि की सुसंगत धाराओ के तहत मुकदमा भी दर्ज होगा
आपत्तिजनक एवं भड़काऊ सामग्री का खंडन करने हेतु  पुलिस के सहयोगी के रूप में जनता से डिजिटल वालेंटियर्स बनेंगे
लखनऊः 11 जनवरी, 2016
    फेसबुक, ट्वीटर, व्हाट्स एप्प, यू-ट्यूव, इंस्टाग्राम, गूगल प्लस सहित अन्य सोशल मीडिया पर प्रदेश की शांति व्यवस्था एवं साम्प्रदायिक सद्भाव को प्रभावित करने वाली सामग्री पर पुलिस की अब पैनी नजर रहेगी। आपत्तिजनक एवं भड़काऊ सामग्री पाये जाने पर उन्हें ब्लॉक करने की कार्यवाही भी नियमानुसार की जायेगी एवं आईटी एक्ट व भादवि की सुसंगत धाराओ के तहत प्रथम सूचना रिपोर्ट (FIR) भी दर्ज होगी।
    सोशल मीडिया पर आपत्तिजनक एवं भड़काऊ सामग्री का खंडन करने हेतु पुलिस के सहयोगी के रूप में जनता के लोगों में से डिजिटल वालेंटियर्स (Digital Volunteers) बनाये जायेगे जो विशेष पुलिस अधिकारी या शांति समिति के सदस्यों की भांति कार्य करंेगे। डिजिटल वालेंटियर्स उन्हीं लोगो को बनाया जायेगा जो सोशल मीडिया का प्रयोग सामान्य रूप से करते है और इंटरनेट पर सक्रिय रहते है। इसमें इंटरनेट पर सक्रिय पुलिसकर्मी भी इस कार्य लगाये जायेंगे। भ्रामक तथ्यों के खंडन एवं सही तथ्यों को डिजिटल वालेंटियर के सहयोग से सोशल मीडिया पर प्रचारित-प्रसारित किये जाने मंे मदद ली जायेगी।
    पुलिस महानिदेशक श्री जावीद अहमद द्वारा इस संबंध में जारी निर्देशों की विस्तृत जानकारी आज मीडिया सेंटर एनेक्सी में पुलिस महानिरीक्षक कानून व्यवस्था श्री ए. सतीश गणेश द्वारा दी गयी। उन्होंने बताया कि इसके लिये प्रदेश में दो सोशल र्मीिडया लैब ‘‘सोशल मीडिया कमाण्ड एण्ड रिसर्च सेंटर’’ के नाम से खोली गयी है। इनमें से एक सोशल मीडिया लैब मेरठ में डीआईजी रेंज के कार्यालय तथा दूसरी स्पेशल टास्क फोर्स लखनऊ के कार्यालय में स्थापित की गयी है। मेरठ परिक्षेत्र में खोली गयी सोशल मीडिया लैब से प्रदेश के सभी परिक्षेत्रों के अलावा यातायात निदेशालय एवं मेरठ परिक्षेत्र के सभी 6 जिलों को भी जोड़ा गया है। स्पेशल टास्क फोर्स गम्भीर प्रकरणों में निगरानी एवं कार्यवाही करेगा।
    उल्लेखनीय है कि वर्तमान समय में सोशल नेटवर्किंग साइट्स से समाज में विचारों एवं सूचनाओं के आदान-प्रदान में क्रांतिकारी परिवर्तन आया है। प्रदेश के ग्रामीण क्षेत्रों में भी सोशल मीडिया का प्रभाव काफी बढ़ा है। इसके माध्यम से जहां बड़ी संख्या में लोग अपने विचारों का आदान प्रदान करते है वहीं इसकी व्यापकता तथा शीघ्रता से लोगों तक पहुंच के कारण इसका दुरूपयोग धार्मिक उन्माद फैलाने, व्यक्तिगत प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाने एवं अन्य तरह से दुष्प्रचार में भी किया जा रहा है। सोशल मीडिया के दुरूपयोग संबंधी कई उदाहरण भी पूर्व में सामने आये है जिसके माध्यम से लोेगों की धार्मिक भावनाए भड़काने का प्रयास किया गया जिसकी परिणिति गम्भीर कानून-व्यवस्था के रूप में सामने आयी है।
    सोशल नेटवर्किंग साइट्स के दुरूपयोग को रोकने के संबंध में बनाई गयी उक्त नई व्यवस्था से इस पर काफी अंकुश लगाया जा सकेगा। इसके माध्यम से संदेशो के रूझान की समीक्षा किये जाने एवं उसके प्रणेता (Originater) का भी पता करने का प्रयास होगा। रूझानों का विश्लेषण कर कानून-व्यवस्था की समस्याओं का आकलन किया जायेगा और संबंधित जनपदों को सचेत कर अभिसूचना संकलन व पुलिस प्रबंध हेतु भी निर्देशित किया जायेगा। सोशल मीडिया पर पायी जाने वाली आपत्तिजनक व भड़काऊ प्रतिक्रिया का खंडन तत्काल पुलिस द्वारा सोशल मीडिया साहित समाचार पत्रों एवं इलेक्ट्रानिक मीडिया के माध्यम से सही तथ्यपरक जानकारी प्रसारित करके किया जायेगा।
    सोशल मीडिया पर आने वाली सामग्री की इसके माध्यम से निगरानी की जा सकेगी और आपत्तिजनक अथवा भड़काऊ एवं संवेदनशील प्रकार के पोस्ट या संदेशो के संबंध में जनपद के पुलिस अधीक्षक को अवगत कराया जायेगा। आपत्तिजनक सामग्री का तत्काल खंडन भी सुनिश्चित किया जायेगा।
    पुलिस महानिदेशक मुख्यालय द्वारा इस योजना के क्रियान्वयन एवं इस कार्य में लगे पुलिस कर्मियों के प्रशिक्षण के लिये विस्तृत कार्ययोजना बनायी गयी है तथा नोडल अधिकारी की भी व्यवस्था की गयी है। प्रत्येक जिले, परिक्षेत्र व जोन स्तर के दो-दो पुलिस कर्मियों को सोशल मीडिया के संबंध में विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किये जाने की भी रूपरेखा तैयार की गई है।
    इसके अलावा तकनीकी सेवा मुख्यालय पर ‘‘वाट्सएप सर्विलांस केन्द्र’’ भी संचालित किया गया है, जिसका सीयूजी नं0 9454401002 है। इस नम्बर पर कोई भी व्यक्ति ऐसे विवादित या आपत्तिजनक संदेशो के संबंध में जानकारी दे सकता है जो सोशल मीडिया पर प्रचलित हो एवं उनमें पुलिस कार्यवाही की आवश्यकता हो। इन संदेशों का विश्लेषण कर इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही होगी।
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