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बच्चों से रेप वाले मामले मे संसद बनाऐ ज़्यादा सख्त कानूनःसुप्रीम कोर्ट

बच्चों से रेप वाले मामले मे संसद बनाऐ ज़्यादा सख्त
कानूनःसुप्रीम कोर्ट

दिल्ली:-सुप्रीम कोर्ट ने संसद को सुझाव दिया है कि वह बच्चों से रेप के मामले में ज्यादा सख्त सजा पर विचार करे। इन मामलों में रेपिस्ट को नपुंसक बनाने की सजा देने की मांग को भी कोर्ट ने विधायिका के जिम्मे छोड़ दिया। महिला वकील संगठन की तरफ से दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि हम सरकार को बच्चों के साथ रेप में सजा के लिए कुछ सुझाव दे सकते हैं। कानून बदलने और बनाने का अधिकार संसद के पास है।
  जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस एन. वी. रमणा की बेंच से मांग की गई थी कि बच्चों से रेप के मामले में नपुंसक बनाने जैसी सजा होनी चाहिए। अमेरिका, पोलैंड, रूस व साउथ कोरिया जैसे कई देशों में ऐसा प्रावधान है। मद्रास हाई कोर्ट ने भी ऐसी सजा का सुझाव दिया था। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से रेप की परिभाषा पर सवाल किया। एजी ने कहा कि रेप मामले में नाबालिग का जिक्र है, बच्चे का जिक्र नहीं है। कोर्ट इस दलील से सहमत था कि बलात्कार के मामले में दस साल की उम्र तक के बच्चों को अन्य नाबालिग बच्चों के बराबर नहीं रखा जा सकता और बलात्कार के ऐसे अपराध में बच्चे को परिभाषित करना चाहिए।
  याचिकाकर्ताओं में से एक वरिष्ठ वकील महालक्ष्मी पावनी का कहना है, 'पिछले कुछ वर्षों में बच्चों के साथ यौन अपराध की घटनाएं बढ़ी हैं। 2012 में ऐसी कुल घटनाओं की संख्या 38,172 थी जो 2014 में बढ़कर 89,423 हजार हो गई।' उन्होंने मद्रास हाई कोर्ट के उस फैसले का भी जिक्र किया जिसमें नाबालिग के साथ रेप करने के दोषी को कोर्ट ने नपुंसक बनाने की सजा दी। पावनी का कहना है, 'जघन्य अपराधों की सजा भी कड़ी होनी चाहिए। समाज में जो कुछ हो रहा है उस पर कोर्ट की भूमिका मूकदर्शक की नहीं हो सकती है। इस मामले में प्रक्रियागत भूमिकाओं से आगे बढ़कर न्यायिक सक्रियता बरतने की जरूरत की बात कही है।

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