Header Ads

पठानकोट हमले की पूरी स्टोरी शाइन न्यूज़ पर

गुरसेवक को आखिरी सलामी, पिता निरंजन को विदाई देने पहुंची 2 साल की बेटी

नई दिल्ली/बेंगलुरु/अंबाला-
पठानकोट एयरबेस पर आतंकी हमले के शहीदों को सोमवार को आखिरी विदाई दी जा रही है। अंबाला के गरनाला गांव में एयरफोर्स के गरुड़ कमांडो गुरसेवक सिंह को सलामी दी गई। वहीं, एनएसजी बम डिफ्यूजल स्क्वॉड के हेड लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन ई. कुमार का पार्थिव शरीर बेंगलुरु के बीईएल ग्राउंड पर रखा गया है। यहां निरंजन की 2 साल की बेटी विस्मया पिता भी पहुंची।

 

कैसे शहीद हुए एनएसजी के अफसर निरंजन और एयरफोर्स के कमांडो गुरसेवक...

 

- गुरसेवक एयरफोर्स की अपनी कमांडो फोर्स गरुड़ के मेंबर थे। जब शनिवार तड़के आतंकियों ने पठानकोट एयरबेस पर हमला किया, तब गुरसेवक एयरबेस के अंदर सेकंड सिक्युरिटी लेयर की कमान संभाल रहे थे।

- उन्हें शुरुआती फायरिंग में गोलियां लगीं। वे फिर भी लड़ते रहे। बेहद जख्मी हालत के बावजूद उन्होंने मोर्चा संभाले रखा।

- ज्यादा गोलियां लगने से उनकी जान चली गई। गुरसेवक की डेढ़ महीना पहले ही जसप्रीत कौर से शादी हुई थी।

- उनके पिता सुच्चा सिंह का कहना है कि एक बेटा देश के लिए शहीद हो गया तो क्या, देश की सेवा के लिए उनका दूसरा बेटा हरदीप सिंह अभी आर्मी में है। 

- वहीं, निरंजन पठानकोट में मारे गए एक आतंकी के शरीर में बंधे एक्सप्लोसिव को डिफ्यूज कर रहे थे।
- लेकिन आतंकी के शरीर पर इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस बंधी थी।
- निरंजन के उसे छूते ही धमाका हो गया। बेहद जख्मी हालत में उन्हें अस्पताल ले जाया गया, लेकिन उन्हें नहीं बचाया जा सका।

 

अपडेट्स-

 

- बेंगलुरु में एनएसजी के लेफ्टिनेंट कर्नल निरंजन का शव पहुंचा। उनकी पत्नी डॉ. राधिका और 2 साल की बेटी विस्मया भी पहुंची। सुबह स्कूल के बच्चों ने भी निरंजन को श्रद्धांजलि दी।

- गरनाला में गुरसेवक को एयरफोर्स के जवानों ने दी आखिरी सलामी। यहीं उनका अंतिम संस्कार किया गया।

- हरियाणा के मिनिस्टर अनिल विज और कैप्टन अभिमन्यु पहुंचे।

- शहीद गुरसेवक सिंह का पार्थिव शरीर अंबाला में उनके घर पहुंचा। 
- हरियाणा के सीएम ने 20 लाख की आर्थिक मदद का एलान किया।
- 18 नवंबर को हुई थी 26 साल के गुरसेवक की शादी। 

 

शहीद निरंजन की फैमिली ने क्या कहा?

 

- एनएसजी के निरंजन की शहादत पर बहन ने कहा कि वे निरंजन को अर्जुन के रूप में देखती हैं, जिसने अपनी कर्मभूमि के लिए जान दे दी।
- बेटे की शहादत पर निरंजन के पिता ने बताया कि वह शुरुआती दिनों से ही आर्मी में जाना चाहते थे।
- केरल के पलक्कड़ जिले के इलंबसेरी गांव में जन्मे निरंजन ने कम उम्र में ही अपनी मां को खो दिया था।
- वह बेंगलुरु में अपने दो भाइयों और एक बहन के साथ पले-बढ़े।
- एनएसजी में जाने से पहले वे सेना के मद्रास इंजीनियरिंग ग्रुप में अप्वाइंट हुए थे।

 

सितंबर में फैमिली से मिलने गए थे निरंजन

- तीन साल पहले यहीं उनकी शादी डॉक्टर केजी राधिका से हुई। 
- वह सितंबर में घरवालों से मिलने आए थे। उनकी दो साल की एक बेटी है, जिसका नाम विस्मया है।

 

No comments

'; (function() { var dsq = document.createElement('script'); dsq.type = 'text/javascript'; dsq.async = true; dsq.src = '//' + disqus_shortname + '.disqus.com/embed.js'; (document.getElementsByTagName('head')[0] || document.getElementsByTagName('body')[0]).appendChild(dsq); })();
Powered by Blogger.